झारखंड : मंईयां योजना पर संकट…आधार लिंकिंग के अभाव में 11 लाख महिलाओं के खाते में अटकी 15वीं किश्त की राशि, जानें क्या करें?
The Maiyaan scheme is in trouble! Due to a lack of Aadhaar linking, the 15th installment of the scheme's funds is stuck in the accounts of 1.1 million women. What should be done?

झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां योजना, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है. जहां महिला एवं बाल विकास विभाग योजना के सुचारू क्रियान्वयन और लाभार्थियों के खाते में राशि भेजने का दावा कर रहा है, वहीं राज्य की लाखों महिलाओं की जमीनी शिकायतें इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं.
विभाग का कहना है कि अधिकांश पात्र महिलाओं को योजना की किस्त जारी कर दी गई है और कुछ लाभार्थियों को आधार लिंकिंग या बैंक खाते की त्रुटियों जैसे तकनीकी कारणों से भुगतान में विलंब हो रहा है. हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों की हकीकत कुछ और ही बयां करती है. पलामू, रांची, हजारीबाग और कोडरमा जैसे जिलों के कई लाभुकों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें अभी तक योजना की एक भी किस्त का भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ रहा है.
निगरानी प्रणाली की कमजोरी उजागर
विभाग भले ही बैंक और तकनीकी समस्याओं को देरी का कारण बता रहा हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि असली समस्या योजना की निगरानी और डेटा प्रबंधन प्रणालियों की कमजोरी है.राशि न मिलने से चिंतित महिलाएं लगातार बैंकों और पंचायत कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है. कुछ स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से अधिकारियों से शिकायत भी दर्ज कराई है.
विपक्ष ने घेरा, बताया ‘चुनावी हथकंडा’
इस बीच, विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए मंईयां योजना को महज ‘चुनावी हथकंडा करार दिया है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार सिर्फ आंकड़ों का खेल कर रही है, जबकि योजना का वास्तविक लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंच ही नहीं रहा है. यह मामला सरकार के महिला सशक्तिकरण के बड़े वादों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को उजागर करता है.









