बिहार: नीतीश कुमार सरकार में मंत्री और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता कार्तिक कुमार से आखिर कानून विभाग का जिम्मा वापिस ले लिया गया है। वारंट के विवादों में चल रहे मंत्री कार्तिक कुमार के विभाग में बदलाव किया गया है। उनसे काननू विभाग का जिम्मा वापस लेकर अब गन्ना और उद्योग विभाग दिया गया है। वहीं अब कानून विभाग की जिम्मेदारी शमीम अहमद को सौंंपी गई है। दोनों नए मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर कैबिनेट सचिवालय से आदेश भी जारी कर दिया है।

कार्तिक कुमार उस वक्त सुर्खियों में आए जब कानून मंत्री बनते ही उनके खिलाफ वारंट जारी हो गया था। जिस पर बीजेपी ने जमकर निशाना साधा था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कार्तिक कुमार पर यह आरोप लगाते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की थी कि उनके खिलाफ 2014 के अपहरण के एक मामले में गिरफ्तारी वारंट लंबित है।

मुख्य सचिव ने जारी की अधिसूचना

मंत्रिमंडल सचिवालय की ओर से मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने राज्यपाल के आदेश से अधिसूचना जारी की है। इसमें बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 166 (3) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एवं संविधान के अधीन बनी कार्यपालिका नियमावली के नियम 6 (1) एवं 7 (1) के अनुसार मुख्यमंत्री की सलाह से राज्यपाल के आदेश पर कार्तिक कुमार को विधि विभाग के स्थान पर गन्ना उद्योग विभाग एवं गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री डॉ शमीम अहमद विधि विभाग का कार्य आवंटित किया गया है।

कार्तिक को बर्खास्त करने की मांग करते हुए तब भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने सवाल किया, अपहरण के एक मामले में जिस व्यक्ति को अदालत में आत्मसमर्पण करना चाहिए था, उसे राज्य मंत्रिमंडल में कैसे शामिल कर लिया गया। वहीं आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा था कि मंत्री कार्तिकेय कुमार दोषी पाए जाएंगे तो सरकार कार्रवाई करेगी। आरोप लगाने और साबित करने में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि कार्तिकेय कुमार पर अपहरण का केस है। वह कोर्ट में नहीं गए इसलिए वारंट जारी हुआ।

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