छापेमारी में ‘सबूत छीने जाने’ का दावा, 2742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में CBI जांच की मांग
“संविधान बनाम सत्ता? ममता बनर्जी पर 17 संगीन आरोप—ईडी की सुप्रीम कोर्ट में याचिका से देश की राजनीति में भूचाल”

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त तूफान आ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ईडी ने अपनी याचिका में मुख्यमंत्री पर 17 गंभीर आपराधिक आरोप लगाए हैं और सीबीआई जांच की मांग की है। यह मामला 2742 करोड़ रुपये के अवैध कोयला खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है।
ईडी का आरोप है कि 8 जनवरी को हुई छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ने न सिर्फ जांच में बाधा डाली, बल्कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी की—जो कानून के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना कही जा रही है।
छापेमारी के दौरान क्या हुआ? ईडी का सनसनीखेज दावा
ईडी के मुताबिक, 8 जनवरी की सुबह एजेंसी ने आई-पैक (I-PAC) के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर तलाशी शुरू की थी। यह कार्रवाई हवाला नेटवर्क के जरिए कोयला तस्करी से आए अवैध धन के राजनीतिक इस्तेमाल की जांच का हिस्सा थी।
सब कुछ सामान्य चल रहा था—लेकिन तभी दोपहर 12:05 बजे हालात अचानक बदल गए।
ईडी का दावा है कि
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचीं।
ईडी अधिकारियों को धमकाया गया।
जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अहम दस्तावेज जबरन छीन लिए गए।
इन सबूतों को एक ट्रक में भरकर मौके से ले जाया गया।
ईडी ने इसे “कानून के शासन पर सीधा हमला” करार दिया है।
17 संगीन अपराधों का आरोप
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत 17 संज्ञेय अपराधों का उल्लेख किया है, जिनमें शामिल हैं—
डकैती
चोरी
सरकारी अधिकारियों को ड्यूटी करने से रोकने के लिए बल प्रयोग
सबूत नष्ट करना
आपराधिक धमकी
एजेंसी का कहना है कि मुख्यमंत्री, जो राज्य की गृह मंत्री भी हैं, पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर जांच को बाधित करने में शामिल रहीं।
हाईकोर्ट में हंगामा, अब सुप्रीम कोर्ट में टकराव
ईडी ने इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी, लेकिन मुख्यमंत्री के समर्थकों द्वारा कथित हंगामे के कारण सुनवाई 14 जनवरी तक टाल दी गई।
अब एजेंसी सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है और मांग की है कि—
✔ जब्त सामग्री तुरंत वापस कराई जाए
✔ फोरेंसिक जांच कराई जाए
✔ पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच हो
ईडी ने मांगी सुरक्षा
ईडी का दावा है कि व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए कार्यकर्ताओं को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद राज्य पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज कर दीं।
इसी को आधार बनाते हुए एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से अपने अधिकारियों की सुरक्षा की भी मांग की है।
सवाल जो पूरे देश को झकझोर रहे हैं…
क्या मुख्यमंत्री पर लगे आरोप साबित होंगे?
क्या सुप्रीम कोर्ट CBI जांच का आदेश देगा?
क्या यह मामला सिर्फ राजनीति है या कानून के राज की सबसे बड़ी परीक्षा?
एक बात तय है—
यह लड़ाई सिर्फ ईडी बनाम ममता बनर्जी नहीं, बल्कि सत्ता और कानून के बीच सीधी टक्कर बन चुकी है।
आने वाले दिन तय करेंगे कि इस सियासी तूफान का अंजाम क्या होगा…









