छतों पर जलती चिताएं और मंदिर जलमग्न: क्या ये वाराणसी का सबसे भयावह दृश्य है? देखें तस्वीरें जो झकझोर देंगी!

वाराणसी : गंगा इस समय अपने रौद्र रूप में है। माँ गंगा की लहरें जब तांडव पर उतरती हैं, तो केवल घाट नहीं डूबते — ज़िंदगियाँ भी उखड़ने लगती हैं।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है, और अब यह खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। इससे घाटों पर शवदाह और आरती जैसे पारंपरिक कार्यों पर भी असर पड़ा है। दशाश्वमेध, हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट अब जलमग्न हैं, और लोग मजबूरी में अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार घरों की छतों पर कर रहे हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं — शीतला माता मंदिर तक पानी में डूब चुका है, और श्रद्धालुओं के लिए वहाँ पहुँचना असंभव हो गया है। आरती करवाने वाली संस्था ‘गंगा सेवा निधि’ के अनुसार, छतों पर आरती की व्यवस्था अस्थायी है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि कोई और विकल्प नहीं बचा।
गंगा के साथ-साथ वरुणा नदी का भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शक्कर तालाब, पुराना पुल, नक्खी घाट जैसे इलाकों में पानी घरों में घुस चुका है, और 100 से अधिक लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं।
जिला प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं और बाढ़ राहत शिविर फिर से सक्रिय किए जा रहे हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदा के इस मंजर ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है।
इन तस्वीरों को देखना दिल दहला सकता है, लेकिन ये सच्चाई है उस त्रासदी की, जो इस वक्त वाराणसी झेल रहा है।