Budget Lock-in: बजट से 10 दिन तक अफसर कट जाते हैं दुनिया से, न फोन न परिवार – क्यों रहता है ये सख्त रहस्य?

भारत का केंद्रीय बजट: केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी ‘गोपनीय फाइल’

1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना 9वां बजट पेश करने जा रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बजट पेश होने से लगभग 10 दिन पहले नॉर्थ ब्लॉक का बेसमेंट एक किले में तब्दील हो जाता है?

इस ‘लॉक-इन पीरियड’ के दौरान बजट छपाई से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी:

  • फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकते

  • अपने परिवार से नहीं मिल सकते

  • किसी भी तरह की जानकारी बाहर नहीं जाने देते

इस कड़े नियम का मकसद केवल एक है: बजट की एक भी लाइन लीक न हो

इतिहास के दो बड़े हादसे: जब बजट लीक हो गया

  1. 1947 – पहली बार अफसरशाही हिल गई:
    आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश होना था। वित्त मंत्री आर.के. शन्मुखम चेट्टी थे। लेकिन ब्रिटेन के तत्कालीन वित्त मंत्री ह्यू डाल्टन ने टैक्स और ड्यूटी की जानकारी पत्रकार को दे दी। मात्र 20 मिनट में खबर लीक हुई। नतीजा? डाल्टन को माफी मांगनी पड़ी और इस्तीफा देना पड़ा।

  2. 1950 – राष्ट्रपति भवन से लीक:
    बजट दस्तावेज पहले राष्ट्रपति भवन के प्रेस में छपते थे। जॉन मथाई के कार्यकाल में प्रिंटिंग के दौरान जानकारी बाहर चली गई। इसके बाद मथाई को इस्तीफा देना पड़ा। यही वजह थी कि सरकार ने बजट छपाई को नॉर्थ ब्लॉक के सुरक्षित बेसमेंट में शिफ्ट कर दिया।

आज का बजट: डिजिटल और सुरक्षित

  • प्रिंटेड कॉपियां केवल औपचारिकता के लिए सीमित मात्रा में

  • जैमर और साइबर सिक्योरिटी की कई परतें

  • हर आने-जाने वाले का कड़ा रिकॉर्ड

  • डिजिटल सुरक्षा ने इसे इतिहास के सबसे सुरक्षित बजट में बदल दिया


यह लॉक-इन पीरियड अफसरों के लिए इतना सख्त होता है कि वे दुनिया से कट जाते हैं, न फोन की अनुमति होती है, न परिवार से बात। यही वजह है कि बजट पेश होने तक देश की आर्थिक ‘साजिशें’ पूरी तरह नियंत्रित रहती हैं।

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