BREAKING: 12 फरवरी को थमेगा देश? किसान-मजदूरों का ‘भारत बंद’ ऐलान…ट्रेड डील से लेबर कोड तक केंद्र पर सीधा टकराव…
US ट्रेड समझौता, बिजली-बीज विधेयक और OPS की मांग… क्या फिर सड़कों पर उतरेगा देश, या खुलेगा संवाद का रास्ता?

12 फरवरी 2026: क्यों बुलाया गया भारत बंद?
नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी, 2026 को भारत बंद का ऐलान कर देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
यह बंद भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते, नए लेबर कोड, बिजली व बीज विधेयक-2025 और अन्य प्रस्तावित कानूनों के खिलाफ बुलाया गया है। संगठनों का दावा है कि ये नीतियां किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों की आजीविका पर असर डाल सकती हैं।
SKM का आरोप: “नीतिगत बदलाव चाहिए”
SKM ने कहा है कि यह सिर्फ एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि आर्थिक नीतियों में बदलाव की मांग को लेकर संयुक्त आवाज है।
उनका आरोप है कि सरकार की मौजूदा दिशा कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देती है, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और श्रमिक वर्ग दबाव में है।
ये हैं मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
न्यू लेबर कोड को वापस लिया जाए
बिजली विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 रद्द किए जाएं
VB-G RAM G अधिनियम-2025 लागू न हो
पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए
सभी श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी लागू हो
MSP की कानूनी गारंटी और C2+50% फॉर्मूला लागू किया जाए
कृषि मजदूर यूनियन और NREGA संघर्ष मोर्चा ने भी बंद को समर्थन दिया है।
बिजली और स्मार्ट मीटर पर बड़ा विवाद
किसान संगठनों का कहना है कि बिजली विधेयक-2025 से दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता बढ़ सकती है।
उनकी मांग है:
300 यूनिट मुफ्त बिजली
स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म हो
संगठनों का तर्क है कि कृषि पहले से लागत संकट झेल रही है, ऐसे में अतिरिक्त बोझ किसानों को और कमजोर करेगा।
बीज विधेयक और ‘आयात’ की चिंता
नए बीज विधेयक-2025 को लेकर आरोप है कि इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आयात और मूल्य निर्धारण में अधिक छूट मिल सकती है।
किसानों का कहना है कि इससे पारंपरिक बीज प्रणाली प्रभावित होगी और निजी कंपनियों पर निर्भरता बढ़ेगी। हालांकि सरकार की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण का इंतजार है।
मनरेगा बनाम VB-G RAM G
संगठनों का आरोप है कि नया अधिनियम मनरेगा की जगह लेने की कोशिश है।
नरेगा संघर्ष मोर्चा ने इसे ग्रामीण रोजगार के अधिकार पर संभावित चोट बताया है और कहा है कि मनरेगा को कमजोर करना स्वीकार्य नहीं होगा।
भारत-US ट्रेड डील पर तीखा विरोध
संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।
उनका दावा है कि सस्ते आयात से डेयरी और कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी समझौते की आलोचना की है।
वहीं सरकार सुधारों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विकास की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।
राहुल गांधी का समर्थन
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस बंद को समर्थन दिया।
उन्होंने लिखा कि मजदूर और किसान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं और पूछा कि भविष्य से जुड़े फैसलों में क्या प्रभावित वर्गों की राय ली गई?
पुतला दहन की अपील
SKM ने प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतीकात्मक पुतले जलाने की अपील की है।
संगठन का कहना है कि विरोध नीतियों के खिलाफ है, किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं।
टकराव या संवाद?
12 फरवरी का भारत बंद केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और संगठनों के बीच बढ़ते मतभेदों का संकेत माना जा रहा है।
एक ओर सरकार इन्हें सुधार और विकास की दिशा में कदम बता रही है, तो दूसरी ओर किसान-मजदूर संगठन इन्हें आजीविका पर खतरा मान रहे हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं—
क्या सरकार बातचीत का रास्ता चुनेगी?
या 12 फरवरी देश में एक नए आंदोलन की शुरुआत करेगा?
फिलहाल इतना तय है कि यह तारीख राजनीतिक और सामाजिक बहस में बड़ा मोड़ ला सकती है।









