इस मुस्लिम देश में खूनी तांडव! अंधाधुंध गोलियों से 31 लोगों का कत्ल, गांव बना लाशों का मैदान
नाइजर में एक बार फिर दहशत, बंदूकधारियों ने गांव पर बरसाईं गोलियां, हर तरफ चीख-पुकार

इस मुस्लिम देश में मचा कत्ल-ए-आम? एक साथ 31 लोगों को उतार दिया मौत के घाट
नाइजर के पश्चिमी हिस्से में एक बार फिर खून से सनी सुबह देखने को मिली। वेस्ट नाइजर के एक गांव में बंदूकधारियों ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरा इलाका दहशत में डूब गया। इस भीषण गोलीबारी में कम से कम 31 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
यह खौफनाक हमला रविवार को तिल्लाबेरी क्षेत्र के गोरोउल गांव में हुआ, जहां कानून को ठेंगा दिखाते हुए हमलावरों ने मासूम लोगों को निशाना बनाया।
कानून को रौंदते हुए 31 लोगों की हत्या
गोरोउल से जुड़े यूनियन ऑफ नाइजीरियन स्टूडेंट्स और अन्य छात्र संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर इस नरसंहार की पुष्टि की है। बयान में कहा गया कि
“कानून की परवाह न करने वालों ने 31 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी।”
इस हमले में 4 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गांव में अब भी डर और मातम का माहौल है।
किस संगठन ने मचाया कत्ल-ए-आम?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस खूनी हमले के पीछे कौन है?
अब तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, और न ही आधिकारिक बयान में किसी आतंकी संगठन का नाम सामने आया है।
हालांकि, नाइजर में सक्रिय कई चरमपंथी संगठन सेना और आम नागरिकों दोनों को लगातार निशाना बना रहे हैं।
चश्मदीद ने खोले रोंगटे खड़े कर देने वाले राज
गोरोउल गांव के रहने वाले हामिदौ अमादौ ने दिल दहला देने वाला बयान दिया।
उसने बताया कि,
“कम से कम 31 लोगों को बेरहमी से मार दिया गया। यह हमला इस्लामिक स्टेट इन ग्रेटर सहारा (ISGS) ने किया है।”
नाइजर में इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठनों की सक्रियता पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नाइजर में क्यों बिगड़ते जा रहे हैं हालात?
गौरतलब है कि 2023 में नाइजर की लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर सेना सत्ता में आई थी। सैन्य सरकार ने दावा किया था कि वह देश में बढ़ती हिंसा पर लगाम लगाएगी, लेकिन हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक,
सत्ता परिवर्तन के बाद आतंकी हमलों की संख्या और बढ़ गई है।
4 महीने पहले भी बहा था खून
यह पहला मामला नहीं है।
पिछले साल सितंबर में तिल्लाबेरी इलाके में ही उग्रवादियों ने घात लगाकर सैनिकों पर हमला किया था, जिसमें 14 जवानों की मौत हो गई थी। उस वक्त भी हमले के पीछे संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया था।
नाइजर में हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं। आम नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि क्या यह खूनी सिलसिला यहीं थमेगा या आने वाले दिन और ज्यादा खौफनाक होंगे?









