पश्चिम बंगाल में भाजपा ने अमित शाह को पर्यवेक्षक नियुक्त किया
रिकॉर्ड जीत के बाद भाजपा में हलचल तेज, अमित शाह बने पर्यवेक्षक, 9 मई का दिन क्यों है बेहद अहम

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में इस वक्त हलचल अपने चरम पर है। सरकार बनने से पहले ही ऐसे संकेत मिल रहे हैं, जो सत्ता के गलियारों में गहरे खेल की ओर इशारा कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को राज्य में मुख्यमंत्री चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है, जिससे साफ है कि पार्टी इस फैसले को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
भाजपा ने इसके साथ ही Mohan Charan Majhi को सह-पर्यवेक्षक बनाया है। माना जा रहा है कि इन दोनों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। खास बात यह है कि शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को Rabindranath Tagore की जयंती के दिन आयोजित किया जाएगा, जिससे इस पूरे आयोजन को राजनीतिक के साथ-साथ प्रतीकात्मक महत्व भी मिल गया है।
शपथ से पहले सबसे बड़ा सवाल, कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य की कमान किसे सौंपी जाएगी। इस रेस में सबसे आगे नाम है Suvendu Adhikari का, जिन्होंने एक बार फिर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को उनके गढ़ में मात देकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।
यह पहली बार नहीं है जब अधिकारी ने बनर्जी को हराया हो। इससे पहले भी वे 2021 में नंदीग्राम सीट पर उन्हें कड़ी टक्कर देकर जीत चुके हैं। पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद देकर इस जीत का “इनाम” दिया जा सकता है।
जब उन्होंने भाबनीपुर सीट से नामांकन दाखिल किया था, उस समय अमित शाह खुद उनके साथ मौजूद थे, जिससे यह साफ संकेत मिला था कि शीर्ष नेतृत्व का झुकाव उनकी ओर है।
पार्टी के भीतर क्या चल रहा है?
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री पद का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को ही होगा। लेकिन नाम को लेकर अब भी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है।
वहीं केंद्रीय मंत्री Sukanta Majumdar ने चुनावों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और केरल में एक ही चुनाव आयोग ने चुनाव कराए, लेकिन दोनों राज्यों में परिणामों की व्याख्या अलग-अलग की जा रही है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार बनने दीजिए, उसके बाद मुख्यमंत्री ही तय करेंगे कि प्राथमिकताएं क्या होंगी। हालांकि उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि भाजपा के लिए राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है।
क्या है आगे का संकेत?
बंगाल की राजनीति में फिलहाल हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाया जा रहा है। पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से लेकर शपथ की तारीख तय होने तक, हर फैसला एक बड़े राजनीतिक संदेश की ओर इशारा कर रहा है।
अब नजरें 9 मई पर टिकी हैं, जब यह सस्पेंस खत्म होगा कि आखिर बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथों में जाएगी।









