Budget 2026 का बड़ा उलटफेर! टैक्स नियमों में ऐतिहासिक बदलाव, Apple को मिली ऐसी राहत जिसने सब चौंका दिया

Budget 2026 News:केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने ग्लोबल टेक दिग्गज Apple को जबरदस्त राहत दे दी है. रविवार को भारत सरकार ने विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स नियमों में ऐतिहासिक बदलाव का ऐलान किया, जिससे भारत में iPhone मैन्युफैक्चरिंग का खेल पूरी तरह बदल सकता है.

अब विदेशी कंपनियां अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को मशीनें उपलब्ध करा सकेंगी, वो भी बिना किसी आयकर जोखिम के. यह छूट खास तौर पर उन इलाकों में लागू होगी, जहां कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित हैं और यह नियम अगले पांच साल तक प्रभावी रहेगा.

 आयकर कानून बना था Apple की सबसे बड़ी चिंता

स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विज़न का अहम हिस्सा है, लेकिन Apple लंबे समय से भारत के आयकर कानूनों को लेकर असमंजस में था.

Apple को डर था कि अगर वह अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के लिए मशीनों का भुगतान करता है, तो इसे भारत में उसका ‘बिजनेस कनेक्शन’ माना जा सकता है.
ऐसी स्थिति में iPhone की बिक्री से होने वाली पूरी कमाई पर टैक्स का खतरा मंडरा रहा था.


🇨🇳 चीन से अलग है भारत की टैक्स तस्वीर

चीन की तुलना में भारत के नियम अलग होने के कारण Apple को यहां अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही थी. इसी वजह से अब तक Foxconn और Tata जैसी कंपनियों को खुद ही अरबों डॉलर की मशीनरी में निवेश करना पड़ा.

लेकिन Budget 2026 ने इस सबसे बड़ी अड़चन को एक झटके में दूर कर दिया है.

 बजट 2026-27 में हुआ बड़ा ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए साफ किया कि—

इलेक्ट्रॉनिक सामान के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कानून में संशोधन किया जा रहा है, ताकि केवल मशीनों के स्वामित्व के आधार पर किसी विदेशी कंपनी पर आयकर न लगाया जाए.

 2030-31 तक लागू रहेगा नया नियम

यह नया टैक्स नियम 2030-31 के टैक्स वर्ष तक लागू रहेगा और केवल उन फैक्ट्रियों पर लागू होगा, जो कस्टम्स-बॉन्डेड क्षेत्रों में स्थित हैं.
ये क्षेत्र तकनीकी रूप से भारत की कस्टम सीमा से बाहर माने जाते हैं.

हालांकि, अगर यहां बने उत्पाद भारत में बेचे जाते हैं, तो उन पर आयात शुल्क लगेगा. यही वजह है कि ये यूनिट्स मुख्य रूप से निर्यात के लिए ज्यादा आकर्षक होंगी.

 सरकार की आधिकारिक व्याख्या

बजट से जुड़े एक स्पष्टीकरण दस्तावेज में सरकार ने साफ किया कि—

किसी विदेशी कंपनी द्वारा भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर को
पूंजीगत सामान, उपकरण या टूलिंग उपलब्ध कराने से होने वाली आय को
आयकर से छूट दी जाएगी.

 मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट

टैक्स मामलों की विशेषज्ञ लॉ फर्म BMR Legal के पार्टनर शंकी अग्रवाल के अनुसार—

“यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की सबसे बड़ी बाधा को हटाता है. इससे भारत में उत्पादन तेजी से बढ़ेगा और वैश्विक कंपनियों का भरोसा मजबूत होगा.”

 भारत में Apple की पकड़ हो रही मजबूत

Apple लगातार चीन से बाहर अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस का विस्तार कर रहा है और भारत उसकी रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है.

  • 2022 के बाद भारत में iPhone की बाजार हिस्सेदारी दोगुनी होकर 8%

  • वैश्विक iPhone शिपमेंट में भारत की हिस्सेदारी चार गुना बढ़कर 25%

  • चीन की हिस्सेदारी अब भी 75%, लेकिन दबाव साफ दिख रहा है

(स्रोत: Counterpoint Research)

 सरकार से लगातार बातचीत का नतीजा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने हाल के महीनों में भारतीय अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की थी. कंपनी को डर था कि मौजूदा कानून उसके भविष्य के विस्तार में रोड़ा बन सकते हैं.

अब Budget 2026 के इस फैसले को Apple के लिए
ग्रीन सिग्नल और भारत के लिए
मैन्युफैक्चरिंग गेम-चेंजर माना जा रहा है.

 बड़ा सवाल अब यह है…

क्या इस टैक्स राहत के बाद भारत
चीन को iPhone मैन्युफैक्चरिंग में सीधी टक्कर देने लगेगा?

Budget 2026 ने इशारा साफ कर दिया है—
सरकार अब सिर्फ आम आदमी नहीं,
ग्लोबल दिग्गजों का खेल भी बदलने के मूड में है…

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