पेट्रोल-डीजल रेट पर बड़ा अपडेट…जानें किस शहर में सबसे सस्ता मिल रहा है तेल, देखें अपने शहर के लेटेस्ट रेट
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नई दिल्ली: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतें जारी हो गई हैं. क्रूड ऑयल के अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का असर फिलहाल भारतीय बाजार पर नहीं दिखा है और रेट स्थिर बने हुए हैं.
राष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन राज्यवार टैक्स के कारण कई शहरों में रेट अलग-अलग देखने को मिले. खासकर महानगरों में पेट्रोल 100 रुपये के आस-पास या उससे ऊपर दर्ज किया गया है.
दिल्ली सबसे सस्ता महानगर
आज दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है. यहां रेट अन्य बड़े शहरों की तुलना में काफी सस्ते हैं. वहीं मुंबई और कोलकाता में कीमतें 100 रुपये के पार बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ता खर्च बढ़ा है.
मुंबई-कोलकाता में रेट 100 पार
मुंबई में पेट्रोल 103.44 रुपये और डीजल 89.97 रुपये प्रति लीटर है. कोलकाता में पेट्रोल 104.95 रुपये और डीजल 91.76 रुपये दर्ज किया गया है. इन शहरों में बढ़ा हुआ वैट उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल रहा है.
चेन्नई में भी कीमतें ऊंची
चेन्नई में पेट्रोल 100.75 रुपये और डीजल 92.34 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है. यहां भी कर संरचना के कारण अन्य शहरों की तरह कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. दक्षिण भारत में यह रेट उपभोक्ता बजट पर सीधा प्रभाव डालते हैं.
उत्तरी राज्यों के प्रमुख शहरों का हाल
लखनऊ में पेट्रोल 94.65 और डीजल 87.76 रुपये है जबकि नोएडा में पेट्रोल 94.83 और डीजल 87.96 रुपये दर्ज है. जयपुर में पेट्रोल 104.88 और डीजल 90.36 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है. गुरुग्राम में पेट्रोल 95.19 और डीजल 88.05 रुपये दर्ज हैं.
अन्य बड़े शहरों में स्थिरता
पटना में पेट्रोल 105.18 और डीजल 92.04 रुपये है, जो आज भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. बेंगलुरु में पेट्रोल 102.86 और डीजल 88.94 रुपये दर्ज किया गया. कुल मिलाकर देशभर में ईंधन की कीमतें स्थिर हैं, हालांकि टैक्स के चलते शहरों में मामूली अंतर जारी है.
कौन तय करता है पेट्रोल-डीजल के रेट?
भारत में फ्यूल की कीमतें सेंट्रल अथॉरिटी द्वारा निर्धारित की जाती हैं और देश की कई फैक्टर्स और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, किसी कीमत की अनुमति दी जाती है. इसका पालन डीजल रिटेलर्स और यूजर्स को सख्ती से पालन करना होता है. ऐसे कई कारक हैं जो या तो फ्यूल की कीमतों को नीचे लाते हैं या फिर उन्हें बढ़ाते हैं.






