महाशिवरात्रि से पहले बड़ा बवाल! दरगाह कमेटी पहुंची सुप्रीम कोर्ट, पूजा पर रोक की मांग से गरमाया मामला
कलबुर्गी की ऐतिहासिक दरगाह में शिवरात्रि पूजा को लेकर फिर छिड़ा विवाद, CJI ने जताई नाराज़गी – “हर मामला सीधे अनुच्छेद 32 में क्यों?”

कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) जिले के आलंद स्थित ऐतिहासिक लाडले मशाइक दरगाह एक बार फिर कानूनी और धार्मिक विवाद के केंद्र में आ गई है। महाशिवरात्रि से ठीक पहले दरगाह कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए परिसर में शिवरात्रि पूजा पर रोक लगाने की मांग की है।
दरगाह कमेटी का कहना है कि परिसर की धार्मिक पहचान को बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह का निर्माण या बदलाव न किया जाए। यह याचिका भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई।
15 फरवरी से पहले सुनवाई की मांग
रिपोर्ट्स के अनुसार, दरगाह की ओर से वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने अदालत से अनुरोध किया कि महाशिवरात्रि (15 फरवरी) से पहले इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की जाए। उन्होंने अदालत को बताया कि दरगाह परिसर में शिवरात्रि मनाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे विवाद की आशंका है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल राहत देने के बजाय यह स्पष्ट किया कि वह मामले पर विचार करेगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
CJI सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,
“हर मामला अनुच्छेद 32 के तहत क्यों लाया जा रहा है? इससे यह संदेश जा रहा है कि हाई कोर्ट निष्क्रिय हो गया है। हम इस पर विचार करेंगे।”
14वीं-15वीं शताब्दी से जुड़ा है स्थल
विवाद का केंद्र यह ऐतिहासिक स्थल है, जो 14वीं शताब्दी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ा हुआ है।
परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नामक एक संरचना भी मौजूद है। वर्षों तक यह स्थल धार्मिक सह-अस्तित्व की मिसाल माना जाता रहा, जहां हिंदू पूजा-अर्चना करते थे और मुस्लिम समुदाय अकीदत पेश करता था।
2022 में भड़का था तनाव
साल 2022 में पूजा-अर्चना के अधिकार को लेकर सांप्रदायिक तनाव तब बढ़ गया, जब कथित तौर पर कुछ उपद्रवियों ने शिवलिंग पर आपत्तिजनक सामग्री फेंक दी थी। इस घटना के बाद मामला और संवेदनशील हो गया।
हाई कोर्ट का फैसला और सुरक्षा के बीच पूजा
फरवरी 2025 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिंदू समुदाय के 15 सदस्यों को राघव चैतन्य शिवलिंग पर महाशिवरात्रि पूजा की अनुमति दी थी। यह पूजा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई थी।
इससे पहले भी अदालत के आदेश के आधार पर सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को अनुष्ठान की अनुमति दी गई थी और तब भी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई थी।









