बड़ी खबर – ‘आधार कार्ड को माना जाए 12वां दस्तावेज’ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, चुनाव प्रक्रिया में आधार को मान्यता, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं
Big news - 'Aadhar card should be considered the 12th document', big order of the Supreme Court, Aadhar is recognized in the election process, but not as proof of citizenship

नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है कि वह आधार कार्ड को चुनावी प्रक्रिया में पहचान के 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। बता दें कि बिहार के जो लाखों मतदाता वोटर आईडी और आधार कार्ड को मान्यता न होने की वजह से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए अपने पुराने दस्तावेज नहीं दिखा पा रहे थे, उन्हें इससे फायदा होगा।
सोमवार को चुनाव आयोग (ECI) के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें आधार कार्ड को चुनाव प्रक्रिया में मान्यता देने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आधार कार्ड को पहचान पत्र के तौर पर स्वीकार किया जाएगा, लेकिन इसे नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में पहले से 11 दस्तावेज मान्य हैं और अब आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल किया जाए। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि अगर आधार से संबंधित किसी भी मामले पर शंका हो तो आयोग जांच कराने के लिए स्वतंत्र होगा।
कपिल सिब्बल की दलील
सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि 10 जुलाई को ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को आधार स्वीकार करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके, अभी भी लगभग 65 लाख लोगों के लिए आधार को मान्यता नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि आयोग के अधिकारियों (BLO) को केवल 11 दस्तावेजों को ही मान्य मानने का निर्देश दिया गया था। जब कुछ अधिकारियों ने आधार को भी स्वीकार किया तो उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। सिब्बल ने इसे न्यायालय के आदेश की अवहेलना बताया और कहा कि आधार को 12वां दस्तावेज घोषित किया जाए।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कोर्ट में कहा कि जिन नोटिसों का जिक्र किया जा रहा है, वे उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। इस पर कपिल सिब्बल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह दस्तावेज आयोग के ही हैं और उन पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी का हस्ताक्षर मौजूद है।
कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस ने कहा कि पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र को छोड़कर अन्य 11 दस्तावेजों को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। हालांकि, आधार को पहचान के प्रमाण के रूप में जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of People Act) के तहत शामिल किया जा सकता है। अदालत ने इस मामले में आयोग से जवाब मांगा और नोटिस भी पेश करने को कहा।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की है। तब तक चुनाव आयोग को आधार कार्ड को लेकर जारी किए गए नोटिसों और संबंधित दस्तावेजों को अदालत में प्रस्तुत करना होगा।

















