महिला आरक्षण पर बड़ा गेम प्लान! 2029 से पहले ही बदल सकती है सियासत—क्या आपके राज्य में भी लागू होगा नया फॉर्मूला?

सियासत में महिलाओं की एंट्री का नया रास्ता

केंद्र सरकार अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की तैयारी में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पहले इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था, लेकिन अब सरकार इस शर्त को हटाकर इसे जल्द लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। बताया जा रहा है कि मौजूदा बजट सत्र में ही इसके लिए दो नए संशोधन विधेयक लाए जा सकते हैं।

 पहला चुनाव कौन सा होगा? यहां से शुरू होगा बड़ा बदलाव

 मुख्य लक्ष्य – 2029 लोकसभा चुनाव
सरकार की योजना है कि 2029 लोकसभा चुनाव पहला ऐसा आम चुनाव बने, जिसमें महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा।

 इसके साथ ही

  • ओडिशा

  • आंध्र प्रदेश

  • सिक्किम

  • अरुणाचल प्रदेश

के विधानसभा चुनावों में भी इसे एक साथ लागू किया जा सकता है।

 क्या 2027 में ही हो सकता है ‘ट्रायल’?

अगर संसद में संशोधन बिल बिना रुकावट पास हो जाते हैं, तो सरकार 2029 से पहले ही इसका ‘टेस्ट रन’ कर सकती है।

 ऐसे में 2027 में होने वाले चुनाव—

  • उत्तर प्रदेश

  • उत्तराखंड

  • पंजाब

में महिला आरक्षण लागू हो सकता है। हालांकि इसकी संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

 नया फॉर्मूला क्या है? समझिए आसान भाषा में

 सीटों में 50% की बढ़ोतरी
लोकसभा की 543 सीटें बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं।

 महिलाओं के लिए 273 सीटें रिजर्व
यानी कुल सीटों का एक-तिहाई हिस्सा महिलाओं के लिए तय होगा।

 राज्यों में भी यही फॉर्मूला
हर राज्य की विधानसभा सीटों में भी 50% तक बढ़ोतरी की जाएगी।

 लॉटरी सिस्टम से सीट तय
2011 की जनगणना के आधार पर ‘लॉटरी सिस्टम’ से तय होगा कि कौन-सी सीट महिला के लिए आरक्षित होगी।

कैसे बदलेगा चुनावी गणित?

 जिन राज्यों में 1-2 सीटें हैं, वहां हर तीसरे चुनाव में सीट महिलाओं के लिए रिजर्व होगी।
 बड़े राज्यों में सीटें 15 साल (तीन कार्यकाल) तक महिलाओं के लिए आरक्षित रह सकती हैं।

 कहां नहीं होगा असर?

 राज्यसभा
राज्य विधान परिषद

इन पर इस आरक्षण का कोई असर नहीं पड़ेगा।

 आम सहमति बनाने में जुटे अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर NDA और विपक्षी दलों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।

 संभावना है कि 28-29 मार्च के आसपास संसद में बिल पेश हो
 सरकार चाहती है कि 4 अप्रैल से पहले इसे पास करा लिया जाए

 पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

सितंबर 2023 में द्रौपदी मुर्मू ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी, जिसे संविधान का 106वां संशोधन कहा जाता है।

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