SBI क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव…आज से नए नियम लागू, जेब पर पड़ सकता है असर…जानें नए नियम
Major Change for SBI Credit Card Users... New Rules Effective Today; Could Impact Your Wallet... Know the New Rules.

एसबीआई क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए 1 मई 2026 से कई अहम नियमों में बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इन बदलावों का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। बैंक ने एनुअल फीस माफी, लेट पेमेंट चार्ज और बकाया राशि पर लागू स्लैब में संशोधन किया है। इन नए नियमों का उद्देश्य जहां एक ओर डिजिटल खर्च को बढ़ावा देना है, वहीं छोटे और अनियमित भुगतान करने वालों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।
SBI BPCL कार्ड में बड़ा बदलाव, अब खर्च का नया टारगेट जरूरी
सबसे बड़ा बदलाव SBI BPCL क्रेडिट कार्ड में देखने को मिलेगा। नए नियम के अनुसार अब कार्डधारकों को एनुअल फीस माफी पाने के लिए कम से कम ₹1 लाख का वार्षिक खर्च करना अनिवार्य होगा। इससे कम खर्च करने वाले ग्राहकों को अब सालाना शुल्क देना पड़ेगा। यह बदलाव खासकर उन यूजर्स को प्रभावित करेगा जो सीमित लेनदेन के लिए कार्ड का उपयोग करते हैं।
एनुअल फीस माफी की सीमा बढ़ी, नियमित यूजर्स को फायदा
एसबीआई ने एनुअल फीस माफी की शर्तों को सख्त कर दिया है। अब ₹1 लाख सालाना खर्च करने पर ही यह सुविधा मिलेगी। पहले यह सीमा कम थी। इसका सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो नियमित रूप से क्रेडिट कार्ड का अधिक उपयोग करते हैं, जबकि कम खर्च करने वाले यूजर्स पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
लेट पेमेंट चार्ज में बदलाव, छोटे बकाये पर भी असर
लेट पेमेंट चार्ज के नियमों में भी संशोधन किया गया है। अब ₹100 तक के बकाये पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वहीं ₹500 तक के बकाये पर अब ₹100 का चार्ज देना होगा, जो पहले ज्यादा था। ₹500 से ₹1000 के बीच बकाये पर अब ₹500 का शुल्क लगाया जाएगा, जबकि पहले यह ₹400 था। यह बदलाव समय पर भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।
बड़े बकाये पर शुल्क यथावत, 50 हजार से ऊपर कोई राहत नहीं
₹50,000 से अधिक बकाया राशि पर लगने वाले चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस श्रेणी में पहले की तरह ₹1300 का शुल्क लागू रहेगा। बैंक का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य भुगतान अनुशासन को मजबूत करना और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाना है।
क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए जरूरी सलाह
एसबीआई क्रेडिट कार्ड धारकों को सलाह दी जाती है कि वे नए नियमों को ध्यान से समझें और समय पर भुगतान सुनिश्चित करें। अधिक खर्च करने वाले और नियमित भुगतान करने वाले ग्राहकों को इन बदलावों से फायदा हो सकता है, जबकि लापरवाही करने वालों के लिए यह नियम आर्थिक बोझ बढ़ा सकते हैं।









