बिग ब्रेकिंग: शिबू सोरेन को पद्म भूषण, केंद्र सरकार ने किया ऐलान, मरणोपरांत मिलेगा देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान
Big Breaking: Shibu Soren to be awarded Padma Bhushan posthumously, India's third highest civilian honour, announced by the central government.

Shibu Soren Big News : झारखंड आंदोलन के पुरोधा और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया है। केंद्र सरकार द्वारा रविवार को घोषित पद्म पुरस्कारों में उनके सामाजिक, राजनीतिक और आदिवासी अधिकारों के लिए किए गए आजीवन योगदान को मान्यता दी गई है। स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय और विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया।
Padma Awards | Singer Alka Yagnik, Former Uttarakhand CM Bhagat Singh Koshyari, Actor Mammootty to be conferred with Padma Bhushan.
Kallipatti Ramasamy Palaniswamy, Dr. Nori Dattatreyudu, Piyush Pandey (Posthumous), S K M Maeilanandhan, Shatavadhani R Ganesh, Former Jharkhand CM… pic.twitter.com/bVMr6MKjE5
— ANI (@ANI) January 25, 2026
शिबू सोरेन को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किए जाने की घोषणा होते ही झारखंड सहित पूरे देश में उनके समर्थकों और अनुयायियों में भावुकता और गर्व का माहौल देखा गया।दिशोम गुरु शिबू सोरेन को झारखंड आंदोलन का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने दशकों तक आदिवासियों, मूलवासियों और वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। अलग झारखंड राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। कठिन परिस्थितियों, संघर्ष और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने झारखंड के निर्माण की लड़ाई को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
शिबू सोरेन न केवल एक जननेता थे, बल्कि आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान की आवाज भी थे। उनके समर्थक उन्हें ‘दिशोम गुरु’ यानी जनता का गुरु कहकर संबोधित करते थे। उनका जीवन सादगी, संघर्ष और जनसेवा का उदाहरण रहा। वे कई बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने और केंद्र सरकार में भी मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। राजनीतिक जीवन के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक चेतना जागृत करने और आदिवासी समाज को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई।
पद्म भूषण सम्मान की घोषणा के बाद झारखंड की राजनीति और सामाजिक जगत में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्य के नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने इसे झारखंड आंदोलन के सम्मान के रूप में देखा है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल शिबू सोरेन को नहीं, बल्कि उस पूरे संघर्ष को समर्पित है, जिसके बल पर झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिबू सोरेन का योगदान केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि उन्होंने आदिवासी संस्कृति, भाषा और अधिकारों की रक्षा के लिए भी निरंतर आवाज उठाई। उन्होंने संसद से लेकर सड़क तक आदिवासियों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा और कई बार सत्ता के खिलाफ खड़े होकर भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले पद्म पुरस्कार हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाते हैं और ये देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं। पद्म भूषण उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण और विशिष्ट सेवा दी हो। शिबू सोरेन को यह सम्मान मिलना उनके दीर्घकालीन सामाजिक और राजनीतिक योगदान की आधिकारिक स्वीकृति माना जा रहा है।









