नई दिल्ली। आज से डीजल जेनरेटर पर बैन लग गया है। जेनरेटर चलाते पकड़े जाने पर ना सिर्फ जेनरेटर सील किया जायेगा, बल्कि कार्रवाई भी की जायेगी। इस संबंध में राज्य सरकार ने आदेश जारी कर दिया है। आदेश के मुताबिक एक अक्टूबर से एनसीआर में डीजल जनरेटर सेट के संचालन पर प्रतिबंध रहेगा। लिहाजा, आवासीय, व्यवसायिक और औद्योगिक इकाइयों में बिजली आपूर्ति के लिए किसी भी क्षमता के डीजल जनरेटर सेट का संचालन नहीं होगा।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की तरफ से जारी आदेश में आयोग ने अस्पताल, नर्सिंग होम, मेट्रो, रेल सहित नौ तरह की इमरजेंसी सेवाओं को इस कड़े प्रविधान से 31 दिसंबर तक के लिए छूट दी है।

इसलिए एस्केलेटर, ट्रेवलेटर के संचालन, अस्पतालों, नर्सिंग होम, दवा और चिकित्सा सामान बनाने वाली इकाइयों, मेट्रो, रेल से संबंधित सेवाओं, एयरपोर्ट, अंतरराज्यीय बस अड्डों, सीवरेज शोधन संयंत्र, वाटर पंपिंग स्टेशन, दूरसंचार सेवाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित सेवाओं के लिए जरूरत पड़ने पर 31 दिसंबर तक डीजल जनरेटर सेट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

दरअसल दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो गया है। सर्दी के मौसम में प्रदूषण अधिक रहने के मद्देनजर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को कहना है कि इमरजेंसी सेवाओं से संबंधित एजेंसियों को भी प्रदूषण की रोकथाम के लिए 31 दिसंबर तक जनरेटर सेट में रेट्रोफिटेड एमिशन कंट्रोल डिवाइस लगाना होगा। अगले वर्ष एक जनवरी से इन जरूरी सेवाओं को भी डीजल जनरेटर सेट के संचालन के लिए छूट नहीं रहेगी।

डीजल जेनरेटर के इस्तेमाल पर रोक
ऐसे में सोसाइटी की एओए पर जुर्माना और सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। नोएडा प्राधिकरण के डीजीएम एसपी सिंह ने बताया कि 1 अक्टूबर को ग्रेप लागू किया जा रहा है। इसमें डीजल जेनरेटर और वायु प्रदूषण कारकों को बढ़ने से रोका जाता है। नोएडा में इसके लिए कई अहम फैसले लिए जा रहे हैं। इस क्रम में सोसाइटियों को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी 95 सोसाइटी को 30 सितंबर तक जेनरेटर को ड्यूल फ्यूल में कंवर्ट कराना होगा। बगैर इसके यदि वे जेनरेटर चलाते हैं तो हमे सीलिंग की कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने बताया कि इसके लिए प्राधिकरण के प्रबंधक आरके शर्मा को नोडल अधिकारी बनाया जा रहा है। इनकी अगुवाई में कई टीमों का गठन किया जा रहा है। ये टीम 1 अक्टूबर से सोसाइटी का निरीक्षण करेंगी। जहां भी जेनसेट चलता मिला उसके खिलाफ मौके पर ही एक्शन लिया जाएगा। इसे अंतिम नोटिस ही माना जाए।
बता दें नोएडा में अब भी कई ऐसी सोसाइटी हैं, जहां बिजली का स्थाई कनेक्शन नहीं है। वहां जेनरेटर से ही सप्लाई की जा रही है। ऐसे में वहां रहने वाले निवासियों को दिक्कत होगी। नोएडा की सोसाइटी में पावर बैकअप के लिए जेनरेटर का प्रयोग किया जाता है। यहां रहने वाले निवासियों से इसके एवज में 25 से 30 रुपए या इससे अधिक रुपए प्रतियूनिट ली जाती है। यहां तभी जेनरेटर चलते हैं जब बिजली सप्लाई नहीं होती।

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