दारोगा पत्नी पर इल्जाम: जिस पत्नी को पढ़ा लिखाकर दारोगा बनवाया, अब वहीं भेज रही है पति को जेल, पति लगा रहा फरियाद, मुझ पर झूठे इल्जाम लगा रही…
Sub-inspector's wife accused: The wife, whom he educated and helped become a sub-inspector, is now sending her husband to jail. The husband is pleading, saying she is making false accusations against him...

Police News: पढ़ा लिखाकर दारोगा बनाया, अब उसी पत्नी ने पति पर FIR दर्ज करने का आरोप लग रहा है। पति का कहना है कि उसने पत्नी की पढ़ाई और करियर में पूरा सहयोग किया, लेकिन अब वही पत्नी पुलिस पद का दुरुपयोग कर उसे और उसके परिवार को झूठे मुकदमों में रही है।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में पति-पत्नी के विवाद का एक अनूठा मामला सामने आया है, जिसने समाज में रिश्तों, कानून और अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
जानकारी के मुताबिक थाना पिलखुवा क्षेत्र के गांव पूठा हुसैनपुर निवासी गुलशन ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी, जो वर्तमान में दारोगा के पद पर तैनात है, उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है और अपने पद का गलत इस्तेमाल कर पूरे परिवार को फंसाने की कोशिश कर रही है।
पीड़ित पति का कहना है कि उसका विवाह वर्ष 2022 में पायल रानी से हुआ था। शादी से पहले दोनों एक-दूसरे को कई वर्षों से जानते थे और आपसी सहमति से विवाह किया गया था।
गुलशन के अनुसार, शादी के बाद उसने पत्नी की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में न केवल आर्थिक सहयोग किया, बल्कि हर स्तर पर उसका मनोबल भी बढ़ाया। पति का दावा है कि दारोगा बनने तक पत्नी की शिक्षा, कोचिंग और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी उसी ने उठाई।
गुलशन का आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद पत्नी का व्यवहार अचानक बदल गया। घरेलू विवाद बढ़ने लगे और बात-बात पर पुलिसिया रौब दिखाया जाने लगा। उसने बताया कि पत्नी अक्सर यह कहकर डराती थी कि वह पुलिस में है और चाहे तो पूरे परिवार को जेल भिजवा सकती है।
पति के मुताबिक, कुछ समय बाद पत्नी ने उस पर और उसके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दहेज उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज करा दिया।
पीड़ित का कहना है कि लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं। उसने किसी प्रकार की दहेज मांग नहीं की और न ही पत्नी के साथ कभी मारपीट या उत्पीड़न किया।
गुलशन का यह भी कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद उसका सामाजिक सम्मान ठेस पहुंची है और पूरा परिवार भय और तनाव में जी रहा है। उसे आशंका है कि झूठे मामलों के चलते उसे और उसके बुजुर्ग माता-पिता को जेल जाना पड़ सकता है।
इस पूरे मामले ने समाज में एक संवेदनशील बहस को जन्म दिया है। एक ओर जहां महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए बने कानून बेहद जरूरी हैं, वहीं दूसरी ओर कानून के कथित दुरुपयोग के आरोप भी सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष और संतुलित जांच बेहद आवश्यक है, ताकि न तो किसी निर्दोष को सजा मिले और न ही किसी वास्तविक पीड़िता को न्याय से वंचित होना पड़े।


















