संगम पर उमड़ा आस्था का महासैलाब! मौनी अमावस्या पर 4 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, प्रयागराज बना भक्ति का महासागर
तड़के से रात तक गूंजते रहे हर-हर गंगे के जयकारे, सीएम योगी ने कहा— सनातन परंपरा को नमन

प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन जो नज़ारा दिखा, उसने हर किसी को रोमांचित और भावुक कर दिया। त्रिवेणी संगम पर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि चारों ओर सिर्फ श्रद्धा, तप और भक्ति का दृश्य दिखाई दिया। माघ महीने की सबसे पवित्र मानी जाने वाली मौनी अमावस्या पर 4 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पावन संगम में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया।
मौनी अमावस्या 2026: जब संगम पर थम गया समय
सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है, लेकिन माघ माह की अमावस्या—मौनी अमावस्या—को सबसे पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान, पूजा और मौन व्रत करने से मन और आत्मा शुद्ध होती है।
साल 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई गई। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही संगम तट पर श्रद्धालुओं की अंतहीन कतारें दिखाई दीं। हर ओर “हर हर गंगे” के जयकारों से माहौल गूंज उठा।
4.52 करोड़ श्रद्धालु, एक दिन, एक संगम
आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के अनुसार, 4.52 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर भारतीय संस्कृति की शाश्वत परंपरा को नमन किया। यह नज़ारा न सिर्फ आस्था की ताकत दिखाता है, बल्कि प्रयागराज को एक बार फिर विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों के केंद्र में ला खड़ा करता है।
सीएम योगी का संदेश: साधुवाद और अभिनंदन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर साधु-संतों, धर्माचार्यों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं का कोटिशः अभिनंदन किया।
उन्होंने लिखा कि यह पावन स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सफल रहा, जिसके लिए पुलिस प्रशासन, मेला प्रबंधन, स्वच्छता सेवकों, स्वयंसेवी संगठनों, नाविक बंधुओं और प्रदेश सरकार के सभी विभागों ने सराहनीय कार्य किया।
आस्था की वो लहर, जो इतिहास बन गई
मौनी अमावस्या 2026 का यह स्नान सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत तस्वीर बनकर उभरा।
जब करोड़ों लोग एक साथ संगम में उतरते हैं, तो सिर्फ पानी नहीं हिलता—इतिहास भी करवट लेता है।









