IND-PAK World Cup: भारत-पाकिस्तान मैच के लिए हजारों फैंस होंगे बीमार , हॉस्पीटल में अभी से ही बेड बुक कराने लगे लोग

नई दिल्ली । भारत-पाकिस्तान मैच के लिए लोग हॉस्पीटल में बेड बुक करा रहे हैं ! चौकिये मत ! ऐसा इसलिए नहीं हो रहा है कि भारत-पाकिस्तान के दिल थाम देने वाले मैच में किसी को अटैक ना आ जाये…बल्कि इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि लोगों को अब होटल्स में बेड नहीं मिल रहे हैं। दरअसल 15 अक्टूबर को भारत पाकिस्तान का चिर प्रतिक्षित विश्व कप मुकाबला नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाना है। इस मैच का इंतजार सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि देश से बाहर भी फैंस कर रहे हैं। हजारों लोग विदेशों से भी भारत मैच देखने के लिए आने वाले हैं। लिहाजा अहमदाबाद के होट्ल्स हाउस फुल हो गये हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान मैच के दिन अहमदाबाद में होटल के कमरे की कीमत 20 गुना से अधिक हो गई है। इस दिन के लिए एक कमरे की कीमत 59000 रुपये तक है। वहीं, शहर के बड़े होटलों में कमरे उपलब्ध नहीं है। एक रात रुकने का लिया जा रहा 1-1 लाख रुपये

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शहर के एक अस्पताल में काम करने वाले डॉ. पारस शाह ने बताया कि प्रशंसक भारत और पाकिस्तान मैच देखने के लिए होटल में कमरा नहीं मिलने पर अस्पताल के बेड बुक करा रहे हैं। अब चूंकि यह अस्पताल है इसलिए वे फुल बाडी चेकअप के लिए पूरी रात रुकने का अपाइंटमेंट ले रहे हैं और सामान्य से लेकर लग्जरी रूम तक बुक करा रहे हैं। जिससे उनका दोनों मकसद पूरा हो सके।जानकारी मिली है कि कुछ फैंस ने अस्पताल में बेड बुक कराया है, जिससे भारत-पाकिस्तान मैच देखने के अलावा वे चिकित्सा सुविधाओं का भी लाभ उठा सकें। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अहमदाबाद में होटल के कमरों की कीमतें 15 अक्टूबर को 20 गुना से अधिक बढ़ गई हैं, जिसकी कीमत 59,000 रुपये से अधिक हो गई। अहमदाबाद में आईटीसी का वेलकमहोटल मैच के दिन 72,000 रुपये का ले रहा था। मैच के दिन शहर की कई बड़े होटल में एक भी कमरा खाली नहीं है।

लोग रूम के पैसे बचाने के लिए अस्पताल में फुल बॉडी चेकअप के लिए रात भर का कमरा बुक कर रहे हैं। डॉ. पारस शाह ने कहा कि भारत-पाक मैच देखने के लिए फैंस डीलक्स से लेकर सुइट तक किसी भी कमरे में रहने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनके अस्पताल में सीमित कमरे हैं, इसलिए वे एनआरआई से अग्रिम बुकिंग स्वीकार करने में सावधानी बरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता मरीजों की देखभाल है और वे उन मरीजों से कमरे छीनना नहीं चाहते जिन्हें उनकी जरूरत है। यही स्थिति कई दूसरे अस्पतालों की भी हैं। सिर्फ अहमदाबाद ही नहीं आसपास के शहरों की भी स्थिति ऐसी ही है।

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