झारखंड में महा-ऑडिट की तैयारी…26 साल का खुलेगा कच्चा चिट्ठा, सभी 33 कोषागारों की जांच से हड़कंप!
Preparations Underway for a 'Mega-Audit' in Jharkhand... 26 Years of Records to Be Laid Bare; Inspection of All 33 Treasuries Sparks Turmoil!

वर्ष 2000 से अब तक का पूरा लेखा-जोखा खंगालेगी सरकार
रांची से सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद झारखंड सरकार अब व्यापक स्तर पर कार्रवाई की दिशा में बढ़ चुकी है। वित्त विभाग ने राज्य गठन वर्ष 2000 से लेकर अब तक संचालित सभी 33 कोषागारों की गहन जांच कराने की सिफारिश की है। इस कदम को वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
बोकारो और हजारीबाग के बाद पूरे सिस्टम पर नजर
विभाग का मानना है कि बोकारो और हजारीबाग में सामने आई अनियमितताओं के बाद यह जरूरी हो गया है कि पूरे राज्य के कोषागारों की जांच की जाए। इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कहीं अन्य जिलों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां तो नहीं हुई हैं।
जांच में पिछले वर्षों के वित्तीय लेनदेन, भुगतान प्रक्रिया और सिस्टम की विश्वसनीयता का गहराई से आकलन किया जाएगा।
हाई लेवल कमेटी करेगी निगरानी
इस व्यापक जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है। इस कमेटी की अगुवाई एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी करेंगे।
समिति में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और महालेखाकार से जुड़े वित्तीय विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। यह टीम न केवल घोटाले की परतें खोलेगी, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों को पहचानकर सुधार के सुझाव भी देगी।
फर्जी निकासी के तरीकों की होगी गहन पड़ताल
जांच के दौरान उन तकनीकों और तरीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनके जरिए फर्जी निकासी को अंजाम दिया गया। इसमें पोर्टल में छेड़छाड़, फर्जी पे आईडी बनाना और बैंक खाते की जानकारी में बदलाव जैसे पहलुओं की विस्तार से जांच होगी।
सीआईडी को सौंपी जा सकती है बड़ी जिम्मेदारी
घोटाले में शामिल आरोपियों की संपत्ति और उनके आपराधिक नेटवर्क की जांच के लिए सीआईडी को जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इससे पूरे मामले की गहराई तक जांच संभव हो सकेगी।
बोकारो और हजारीबाग में स्पेशल ऑडिट, पलामू में राहत
वित्त विभाग ने महालेखाकार से बोकारो और हजारीबाग में तत्काल स्पेशल ऑडिट कराने का अनुरोध किया है। वहीं, पलामू जिले में वेतन से जुड़ी फर्जी निकासी की आशंका जांच में सही नहीं पाई गई है। हालांकि एहतियात के तौर पर वहां भी निगरानी जारी रखी गई है।
पारदर्शी और मजबूत सिस्टम की ओर कदम
सरकार का मानना है कि इस व्यापक जांच से न केवल पुराने मामलों का खुलासा होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए मजबूत और पारदर्शी वित्तीय तंत्र विकसित किया जा सकेगा।









