रांची: “मां नहीं करा रही थी प्रेमिका से शादी” गुस्साये प्रेमी ने गर्लफ्रेंड की मां को काट डाला, अब कोर्ट ने भी आरोपी को नहीं दी राहत
Ranchi: "Mother Refused to Allow Marriage to Girlfriend" — Enraged Lover Hacks Girlfriend's Mother to Death; Court Denies Relief to Accused.

प्रेम संबंध के विवाद में युवती की मां की कुल्हाड़ी से हत्या करने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। घटना जनवरी 2026 की है।
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रांची। प्रेमी से शादी नहीं करा रही थी मां, गुस्से में प्रेमिका की मां की हत्या कर दी। राजधानी रांची से एक सनसनीखेज हत्या मामले में कोर्ट ने भी सख्त रुख दिखाया है। प्रेम संबंध में बाधा बनने पर युवती की मां की निर्मम हत्या करने के आरोपी मांगा मुंडा को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
दरअसल यह घटना 16 जनवरी 2026 की है। तमाड़ थाना में घटना को लेकर कांड संख्या 6/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, तमाड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव की रहने वाली जम्बी कुमारी की शादी खूंटी जिले के टोटवादा निवासी लावू पाहन से हुई थी।
लेकिन शादी के महज दो महीने बाद ही सड़क दुर्घटना में लावू पाहन की मौत हो गई, जिसके बाद जम्बी अपने मायके लौट आई थी।मायके में रहने के दौरान जम्बी कुमारी को कुछ समय के लिए उसकी दादी के घर जमझूड गांव भेजा गया था। वहीं पर उसका अपने ही एक रिश्तेदार मांगा मुंडा के साथ प्रेम संबंध हो गया।
जब इस संबंध की जानकारी परिवार को हुई, तो जम्बी को वापस घर बुला लिया गया। परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था, क्योंकि आरोपी उनका रिश्तेदार था और सामाजिक दृष्टि से यह संबंध स्वीकार्य नहीं था।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मांगा मुंडा जम्बी से शादी करने की जिद पर अड़ा हुआ था। परिवार के विरोध के कारण वह अक्सर जम्बी और उसकी मां को धमकी देता था। घटना वाली रात, जब परिवार के सभी सदस्य खाना खाकर सो चुके थे, तभी आरोपी घर में घुस आया और जम्बी की मां पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
इस जघन्य वारदात के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद आरोपी की ओर से अदालत में जमानत याचिका दाखिल की गई थी, जिसे अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है।अदालत के इस फैसले को गंभीर अपराधों के प्रति सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।









