कांगड़ा में थमे पहिये, सड़कों पर हाहाकार! चक्काजाम ने रोकी दूध-रोटी तक… आखिर क्यों भड़के ऑपरेटर?

धर्मशाला से देहरा तक प्रदर्शन का तूफान—स्कूल बंद, हाईवे जाम और आम जनता बेहाल

धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा  जिले में सोमवार सुबह से हालात अचानक बदल गए, जब कमर्शियल वाहन ऑपरेटरों ने हड़ताल का ऐलान कर सड़कों पर उतरकर चक्काजाम कर दिया।

ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के विरोध में सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक चलने वाली इस हड़ताल ने पूरे जिले की रफ्तार थाम दी है।

हर तरफ रुके पहिये, जनजीवन प्रभावित
हड़ताल का असर इतना व्यापक रहा कि जिलेभर में टैक्सी, बस, ट्रक और ऑटो सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। इसका सीधा असर स्कूलों पर भी पड़ा—अधिकतर निजी स्कूल बंद रहे और स्कूल बसें सड़कों से गायब दिखीं।

Dharamshala में ऑपरेटर महात्मा गांधी स्मृति वाटिका में जुटे, जहां से उन्होंने आक्रोश रैली निकालने की तैयारी की। वहीं Palampur और Dehra में भी प्रदर्शन ने जोर पकड़ा।

हाईवे पर रोकी गाड़ियां, जरूरी सप्लाई भी प्रभावित
मंडी-पठानकोट हाईवे पर गगल के पास सनौरा चौक और रैत के Chambi में प्रदर्शनकारियों ने कमर्शियल वाहनों को रोक दिया।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि निजी बसों के साथ-साथ दूध और ब्रेड जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई करने वाली गाड़ियां भी रोक दी गईं, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

देहरा और बैजनाथ में भी उग्र प्रदर्शन
देहरा के हनुमान चौक और व्यास पुल के पास ऑपरेटरों ने धरना देकर नारेबाजी की और जाम लगाने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को संभालने की कोशिश की।

वहीं बैजनाथ में भी टैक्सी यूनियन ने रैली निकाली, हालांकि यहां कुछ प्राइवेट बसें चलती रहीं।

सरकार को चेतावनी
ऑपरेटर यूनियनों ने साफ कहा है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि हड़ताल के कारण जनता को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी सरकार की होगी।

आखिर क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे प्रदर्शन की जड़ में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) का विरोध है, जिसे लेकर ऑपरेटरों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यह सिस्टम उनके लिए मुश्किलें बढ़ाएगा।

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