झारखंड : सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत…आलमगीर आलम और संजीव लाल की जमानत खारिज
ट्रायल तेज करने के सख्त निर्देश

रांची से जुड़े चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए ट्रायल को तेज गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
चार हफ्तों में गवाहों के बयान दर्ज करने का आदेश
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि चार सप्ताह के भीतर प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तभी तय होगी, जब गवाहों की जांच प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
उम्र और लंबी हिरासत की दलील खारिज
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आलमगीर आलम की उम्र 76 वर्ष है और वे मई 2024 से जेल में हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि ईडी की ओर से बार बार पूरक चार्जशीट दाखिल किए जाने से मामला लंबा खिंच रहा है। हालांकि कोर्ट ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना और जमानत देने से इनकार कर दिया। संजीव लाल की ओर से दी गई दलीलें भी अदालत को संतुष्ट नहीं कर सकीं।
32 करोड़ नकदी बरामदगी से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला ईडी की कार्रवाई से जुड़ा है। 6 मई 2024 को संजीव लाल और उनके करीबी जहांगीर आलम के ठिकानों पर छापेमारी में करीब 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। जांच में एक डायरी भी मिली थी, जिसमें कथित तौर पर टेंडर कमीशन से जुड़े लेनदेन का विवरण दर्ज था।
पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारी
ईडी ने पूछताछ के बाद 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
अब गवाहों की गवाही पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद अब इस हाई प्रोफाइल मामले में गवाहों की गवाही बेहद अहम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में सुनवाई की रफ्तार तेज होने और मामले में नए पहलुओं के सामने आने की संभावना है।









