ईरान युद्ध का भारत पर ‘आर्थिक असर’! 93 के करीब पहुंचा रुपया, 10 महीने के हाई पर महंगाई… क्या अब और महंगा होगा पेट्रोल-गैस?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव, तेल महंगा हुआ तो आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है सीधा असर

ईरान युद्ध का भारत पर ‘आर्थिक असर’! 93 के करीब पहुंचा रुपया, 10 महीने के हाई पर महंगाई… क्या अब और महंगा होगा पेट्रोल-गैस?

नई दिल्ली:
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और लगभग 93 रुपये प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो इसका असर धीरे-धीरे आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। फिलहाल महंगाई दर भी पिछले करीब 10 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिससे आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं।

तेल की कीमतें बनी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG जैसी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। इससे परिवहन खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी का बजट प्रभावित होने की संभावना है।

रुपये की कमजोरी से आयात महंगा

रुपये की गिरावट के कारण भारत के लिए आयात करना महंगा हो जाता है। देश कई जरूरी वस्तुओं के लिए विदेशों पर निर्भर है, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक उपकरण और कुछ खाद्य उत्पाद। रुपये के कमजोर होने से इन सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

विदेश यात्रा और पढ़ाई पर भी असर

रुपये की कमजोरी का असर विदेश यात्रा और पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस, अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सेवाएं और विदेशी टूर पैकेज पहले से ज्यादा महंगे हो सकते हैं।

EMI पर भी पड़ सकता है दबाव

अगर महंगाई लगातार बढ़ती रही, तो Reserve Bank of India को ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रहना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में लोन की EMI में राहत मिलने की संभावना कम हो सकती है और ऊंची ब्याज दरों का दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है।

फिलहाल पश्चिम एशिया का संकट भारत में सीमित असर दिखा रहा है, लेकिन अगर तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं और रुपया कमजोर होता है, तो आने वाले समय में इसका असर ईंधन, यात्रा और रोजमर्रा के खर्चों के जरिए आम लोगों तक पहुंच सकता है।

 

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