इंसानियत शर्मसार! झारखंड में नहीं मिली एंबुलेंस, गोद में दम तोड़ता रहा मासूम; आखिर कौन है जिम्मेदार?
Humanity shamed! An ambulance was not available in Jharkhand, and an innocent child died in her lap; who is responsible?

Hazaribagh Newborn Death : का एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड स्थित खंभवा बिरहोर टोला में एक आदिम जनजाति परिवार के नवजात शिशु की मौत समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण हो गई. बताया जा रहा है कि सिस्टम की लापरवाही के कारण यह घटना घटी.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विनोद बिरहोर की पत्नी सुरमिल देवी को शुक्रवार 6 मार्च को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा पर फोन कर मदद मांगी. हालांकि, उन्हें बताया गया कि एंबुलेंस व्यस्त है और फिलहाल सेवा उपलब्ध नहीं हो सकती. वहीं स्थानीय स्तर पर तैनात एंबुलेंस चालक ने गाड़ी के गैरेज में होने की बात कही.
करीब तीन घंटे तक प्रसूता महिला घर पर ही प्रसव पीड़ा झेलती रही. इस दौरान परिजन मदद के लिए इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन समय पर कोई व्यवस्था नहीं हो सकी. आखिरकार इस दौरान जन्मे नवजात शिशु की मौत हो गई. Hazaribagh Newborn Death की इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है.









