ईद से पहले छाया अंधेरे का खतरा! इजरायल-ईरान जंग का असर, बांग्लादेश में यूनिवर्सिटी बंद… बिजली बचाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला
मिडिल ईस्ट युद्ध की आंच अब दक्षिण एशिया तक, ऊर्जा संकट गहराया तो स्कूल-कॉलेज बंद कर बचाई जा रही बिजली

ढाका: मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष की आंच अब दक्षिण एशिया तक पहुंचती नजर आ रही है। युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई उथल-पुथल का असर बांग्लादेश पर भी पड़ने लगा है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरकार को बिजली और ईंधन बचाने के लिए देशभर की यूनिवर्सिटियों को बंद करने का फैसला करना पड़ा है।
सरकारी आदेश के मुताबिक सोमवार से बांग्लादेश की सभी सरकारी और निजी यूनिवर्सिटियां बंद रहेंगी। इसका मतलब यह है कि ईद-उल-फितर की छुट्टियां भी तय समय से पहले शुरू हो जाएंगी। सरकार का कहना है कि यह कदम ऊर्जा संकट से निपटने और बिजली की खपत कम करने के लिए उठाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार यूनिवर्सिटियों में हॉस्टल, क्लासरूम, लैब और एयर कंडीशनिंग के कारण बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती है। ऐसे में संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद करने से बिजली की मांग कम होगी। साथ ही ट्रैफिक में कमी आने से ईंधन की खपत भी घटेगी।
दरअसल बांग्लादेश पहले से ही ऊर्जा के मामले में आयात पर बेहद ज्यादा निर्भर है। देश अपनी लगभग 95 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों से ईंधन और गैस खरीदता है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और अनिश्चित सप्लाई के कारण अब फ्यूल और गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस बीच रमजान के चलते देश के सरकारी और निजी स्कूल पहले ही बंद हैं। ऐसे में अधिकांश शैक्षणिक संस्थान फिलहाल बंद ही रहेंगे। सरकार ने विदेशी स्कूलों और निजी कोचिंग सेंटरों से भी अपील की है कि वे इस दौरान बिजली की बचत के लिए अपनी गतिविधियां रोक दें।
ऊर्जा संकट का असर उद्योगों पर भी पड़ रहा है। गैस की भारी कमी के चलते सरकार को अपनी पांच सरकारी उर्वरक फैक्ट्रियों में से चार का उत्पादन बंद करना पड़ा है। बिजली कटौती से बचने के लिए उपलब्ध गैस को पावर प्लांटों की ओर मोड़ा जा रहा है।
सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए बांग्लादेश को अब स्पॉट मार्केट से ऊंची कीमतों पर LNG खरीदनी पड़ रही है। ऊर्जा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार हर संभव प्रयास कर रही है ताकि बिजली, ईंधन और आयातित ऊर्जा की आपूर्ति स्थिर बनी रहे और देश में बड़े संकट से बचा जा सके।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। बांग्लादेश में लिए गए ये सख्त फैसले इसी संभावित संकट की एक झलक माने जा रहे हैं।









