सियासत में सन्नाटा! चंदेरी के कद्दावर नेता का अंत… अस्पताल में CM की मुलाकात के 24 घंटे बाद थमी सांसें…

छह महीने से कैंसर से जूझ रहे पूर्व विधायक राव राजकुमार सिंह यादव का निधन, प्रदेशभर में शोक की लहर

भोपाल: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और चंदेरी के पूर्व विधायक राव राजकुमार सिंह यादव का लंबी बीमारी के बाद भोपाल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही सियासी गलियारों में सन्नाटा पसर गया और समर्थकों के बीच गहरा शोक छा गया।

बताया जा रहा है कि वे पिछले छह महीनों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और राजधानी के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। हैरानी की बात यह है कि अभी एक दिन पहले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन किसे पता था कि यह मुलाकात आखिरी साबित होगी…

 महुअन की मिट्टी से उठकर सियासत के शिखर तक

72 वर्षीय राव राजकुमार सिंह यादव का जन्म अशोकनगर जिले के महुअन गांव में हुआ था। पारिवारिक पृष्ठभूमि से ही उन्हें राजनीति की प्रेरणा मिली। उनके पिता भी सार्वजनिक जीवन से जुड़े रहे, जिससे क्षेत्र में परिवार की मजबूत पकड़ बनी रही।

चंदेरी और आसपास के क्षेत्रों में उनका प्रभाव इतना था कि स्थानीय मुद्दों पर उनकी राय निर्णायक मानी जाती थी। वे जमीनी हकीकत को समझने वाले नेता के रूप में पहचाने जाते थे।

 पंच से विधायक तक… संघर्ष और उतार-चढ़ाव भरा सफर

राव राजकुमार सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत के पंच पद से की। इसके बाद वे ईसागढ़ जनपद के जनपद अध्यक्ष बने और संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बनाई।

साल 2008 में वे चंदेरी विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। पार्टी ने दोबारा उन पर भरोसा जताया, हालांकि बाद के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक परिस्थितियों के बदलते दौर में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर भी विधानसभा चुनाव लड़ा — जो उनके सियासी जीवन का एक अलग और चर्चित अध्याय रहा।

 अस्पताल में आखिरी मुलाकात… फिर छा गया मातम

बीमारी बढ़ने पर उन्हें भोपाल स्थित जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जानने गए थे।

उनके निधन पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। अशोकनगर और चंदेरी क्षेत्र में शोक सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। समर्थक उन्हें एक जमीनी, बेबाक और प्रभावशाली नेता के रूप में याद कर रहे हैं।

प्रदेश की राजनीति में उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। एक ऐसा चेहरा, जिसने गांव की चौपाल से लेकर विधानसभा तक अपनी पहचान बनाई — अब सिर्फ यादों में रह गया।

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