झारखंड-भाजपा नेता की मौत: डॉक्टर खोजते रह गये परिजन, इलाज के अभाव में भाजपा महामंत्री की मौत, स्वास्थ्य मंत्री पर साधा निशाना
Jharkhand BJP leader's death: Family searches for doctors, BJP general secretary dies due to lack of treatment, Health Minister targeted

सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड के डीपा टोली निवासी भाजपा प्रखंड महामंत्री रामेश्वर सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समय पर इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाया है। घटना के बाद भाजपा नेताओं और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।
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सिमडेगा। झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा हो गया। इलाज के अभाव में भाजपा नेता की मौत हो गयी। घटना झारखंड के सिमडेगा जिले की है। जलडेगा प्रखंड के डीपा टोली निवासी और भारतीय जनता पार्टी के प्रखंड महामंत्री रामेश्वर सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद हुई मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। परिजनों और पार्टी नेताओं का आरोप है कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी जान चली गई।
मिली जानकारी के मुताबिक एक कथा कार्यक्रम में शंकराचार्य के आगमन को लेकर आयोजन चल रहा था। इसी दौरान रामेश्वर सिंह अचानक मंच के पास गिर पड़े। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें संभाला और परिजन उन्हें लेकर जलडेगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। आरोप है कि वहां पहुंचने पर अस्पताल में न तो डॉक्टर मौजूद थे और न ही नर्स। इमरजेंसी वार्ड में भी तत्काल उपचार की कोई व्यवस्था नहीं थी।
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों को फोन किया गया और उन्हें ढूंढने की कोशिश की गई, लेकिन समय पर कोई उपलब्ध नहीं हो सका। ऑक्सीजन और प्राथमिक उपचार जैसी बुनियादी सुविधाएं भी तत्काल उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं। हालत गंभीर होते देख परिजन उन्हें सिमडेगा सदर अस्पताल ले गए, जहां से बेहतर इलाज के लिए बीरू अस्पताल रेफर किया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इधर, घटना के बाद आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ता और ग्रामीण अस्पताल परिसर में जुट गए और विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा नेता अशोक बराइक ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण यह दुखद घटना हुई है। उन्होंने इसे सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की विफलता बताया।
परिजनों और ग्रामीणों ने ड्यूटी से अनुपस्थित डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे चिकित्सकों की तैनाती और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन की सुविधा मिल जाती, तो शायद रामेश्वर सिंह की जान बचाई जा सकती थी।
रामेश्वर सिंह क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय और लोकप्रिय व्यक्ति माने जाते थे। उनके निधन से पूरे इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।









