हाईकोर्ट : DGP-SP हाजिर हों! हाईकोर्ट ने किस बात पर जतायी नाराजगी, वकील की याचिका पर कहा, सभी को बुलाये जाये कोर्ट…

The High Court demanded that the DGP and SP be present! The High Court expressed its displeasure over the lawyer's petition, stating that everyone should be summoned to court...

अधिवक्ता मनोज टंडन की कार और बाइक के बीच हुई टक्कर के बाद जब्त वाहन को कोर्ट के आदेश के बावजूद रिलीज नहीं किए जाने पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने अदालत ने राज्य के डीजीपी, रांची के सिटी एसपी और डोरंडा थाना प्रभारी को तत्काल कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे तेवर दिखाये हैं। दरअसल हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अधिवक्ता मनोज टंडन की जब्त कार को रिलीज नहीं किया गया। अवमानना के मामले में हाईकोर्ट ने नाराजगी जतायी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को ऑनलाइन माध्यम से तथा रांची के सिटी एसपी और डोरंडा थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

दरअसल झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनोज टंडन की कार और एक बाइक सवार के बीच मामूली टक्कर हो गई थी। इस घटना के बाद डोरंडा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने अधिवक्ता की कार को जब्त कर लिया। बताया जा रहा है कि यह एक साधारण सड़क दुर्घटना का मामला था।इस प्रकरण में अधिवक्ता मनोज टंडन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने आदेश दिया था कि अधिवक्ता की कार को रिलीज किया जाए। इसके बावजूद अब तक वाहन को रिलीज नहीं किया गया, जिससे वकीलों में नाराजगी फैल गई। जब मामले की जानकारी अन्य अधिवक्ताओं को हुई, तो उन्होंने इसे कोर्ट के समक्ष गंभीर विषय के रूप में रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि उसके आदेश का पालन नहीं किया गया है।

इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के DGP को ऑनलाइन और रांची के सिटी एसपी सहित डोरंडा थाना प्रभारी को तत्काल उपस्थित होने का निर्देश दिया। बताया जा रहा है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने अधिवक्ता मनोज टंडन के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में पुलिस जांच पर भी रोक लगा दी है। यानी जब तक आगे का आदेश नहीं आता, पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगी। अदालत का यह कदम न्यायिक आदेशों के अनुपालन की अनिवार्यता को रेखांकित करता है।

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