छत्तीसगढ़ बजट: 1.72 लाख करोड़ का ‘संकल्प’ बजट! किसानों की आय दोगुनी करने का ब्लूप्रिंट या चुनावी मास्टरस्ट्रोक?विधानसभा में गूंजा बड़ा ऐलान…

गांव से बस्तर तक बदलेगी तस्वीर?

रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजनीति और अर्थव्यवस्था—दोनों के लिए मंगलवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ। विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये का विशाल बजट पेश किया गया। जैसे ही यह आंकड़ा सदन में गूंजा, सत्ता और विपक्ष दोनों के चेहरों पर अलग-अलग भाव नजर आए।

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने यह बजट ‘संकल्प’ थीम पर पेश किया, जिसमें समावेशी विकास, अवसंरचना, निवेश, कुशल मानव संसाधन और अंत्योदय पर विशेष जोर दिया गया है। 2023 में सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली विष्णु देव साय सरकार का यह तीसरा बजट है।

किसानों के लिए खजाना खुला!

सरकार ने इस बार बजट का सबसे बड़ा फोकस किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर रखा है।

  • भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के लिए 600 करोड़ रुपये

  • कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये

  • निशुल्क पंप योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये

  • पाम ऑयल खेती प्रोत्साहन के लिए 150 करोड़ रुपये

वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई—जो समर्थन मूल्य नीति और सरकारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और खेती की लागत घटेगी।

बेटियों के लिए 1.5 लाख रुपये का वादा

बजट में ‘रानी दुर्गावती योजना’ की घोषणा ने भी सबका ध्यान खींचा। इस योजना के तहत बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसे सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।

बस्तर से सरगुजा तक विकास की बौछार

  • अबूझमाड़ और जगरगुंडा में शिक्षा शहर के लिए 100 करोड़ रुपये

  • कुनकुरी, मनेंद्रगढ़ और दंतेवाड़ा में नए मेडिकल कॉलेज हेतु 50 करोड़ रुपये

  • बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के लिए 10 करोड़ रुपये

  • बस्तर नेट परियोजना के लिए 5 करोड़ रुपये

  • इंद्रावती नदी पर मतनार और देउरगांव बैराज निर्माण हेतु 2,024 करोड़ रुपये

  • 23 नए औद्योगिक पार्कों के लिए 250 करोड़ रुपये

  • मैनपाट में पर्यटन विकास के लिए 5 करोड़ रुपये

  • जगदलपुर और अंबिकापुर में हवाई सेवाओं का विस्तार

सरकार का दावा है कि इन प्रावधानों से न केवल निवेश और रोजगार बढ़ेगा, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई धारा बहेगी।

‘संकल्प’ से ‘परिणाम’ तक?

अपने बजट भाषण में ओ. पी. चौधरी ने कहा कि यह बजट केवल घोषणाओं का पुलिंदा नहीं, बल्कि “नीति से परिणाम” तक पहुंचने का रोडमैप है।

लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या यह बजट सच में किसानों और युवाओं की तकदीर बदलेगा, या आने वाले चुनावों से पहले सियासी जमीन मजबूत करने की रणनीति है?

फिलहाल, 1.72 लाख करोड़ के इस ‘संकल्प’ ने राज्य की सियासत और जनता दोनों के बीच उत्सुकता और उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

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