हाथ-पैरों में दिख रहे ये छोटे बदलाव हो सकते हैं फेफड़ों के कैंसर का संकेत! गलती से भी न करें नजरअंदाज
शरीर दे रहा है चेतावनी… क्या आप पहचान पा रहे हैं इशारे?

कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं। लोग इन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं — और यही लापरवाही आगे चलकर भारी पड़ सकती है।
क्या आप जानते हैं कि कुछ मामलों में हाथ और पैरों में दिखने वाले बदलाव भी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक ये लक्षण कभी-कभी फेफड़ों के कैंसर की ओर इशारा करते हैं।
किस कैंसर में हाथ-पैरों में दिखते हैं लक्षण?
यह संकेत अक्सर Lung cancer (फेफड़ों का कैंसर) से जुड़े हो सकते हैं।
फेफड़ों का कैंसर तब होता है जब फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है।
कुछ अध्ययनों के अनुसार:
पुरुषों में लगभग हर 17 में से 1 को जीवनकाल में इसका खतरा हो सकता है
महिलाओं में लगभग हर 18 में से 1 को इसका जोखिम हो सकता है
(ये आंकड़े सामान्य जोखिम को दर्शाते हैं; व्यक्तिगत जोखिम अलग-अलग हो सकता है।)
हाथ-पैरों में दिखने वाले संभावित चेतावनी संकेत
1️⃣ हाथ-पैर में दर्द या सूजन
अगर बिना किसी चोट या कारण के लगातार दर्द या सूजन हो रही है, तो यह सामान्य नहीं हो सकता।
ट्यूमर नसों या रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है, जिससे सूजन और असहजता बढ़ सकती है।
2️⃣ एडिमा (लगातार सूजन)
शरीर में तरल जमा होने से हाथ-पैर सूज सकते हैं।
अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे और आराम से भी कम न हो, तो इसे नजरअंदाज न करें।
3️⃣ नाखूनों का रंग बदलना
अगर नाखून नीले, बैंगनी या फीके दिखने लगें, तो यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है।
फेफड़ों की गंभीर बीमारी में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे यह बदलाव दिखाई देता है।
4️⃣ सुन्नपन या झुनझुनी
बार-बार हाथ या पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना नसों पर दबाव का संकेत हो सकता है।
कभी-कभी कैंसर आसपास के ऊतकों या नसों को प्रभावित करता है, जिससे ऐसी संवेदनाएं होती हैं।
जरूरी बात
इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता।
सूजन, दर्द या झुनझुनी के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं — जैसे विटामिन की कमी, नस दबना, डायबिटीज या अन्य समस्याएं।
लेकिन अगर:
लक्षण लगातार बने रहें
धीरे-धीरे बढ़ते जाएं
साथ में खांसी, सांस फूलना, वजन घटना या थकान जैसे अन्य लक्षण हों
तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है।
समय पर जांच ही बचाव
फेफड़ों के कैंसर में शुरुआती पहचान इलाज को आसान और प्रभावी बना सकती है।
शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को समझना और समय रहते जांच करवाना ही सबसे बड़ा बचाव है।









