धनबाद में हेमंत सोरेन की कड़ी चेतावनी, कहा, “75% स्थानीय को काम पर रखना ही होगा, नहीं तो अपना हक-अधिकार जरूर लिया जाएगा”
Hemant Soren issued a stern warning in Dhanbad, saying, "75% local people must be employed, otherwise our rights will definitely be taken away."

झामुमो के स्थापना दिवस पर धनबाद पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोयला कंपनियों, स्थानीय नियोजन और झारखंड के अधिकारों को लेकर तीखे तेवर दिखाये । उन्होंने निजी कंपनियों को 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने की चेतावनी देते हुए कहा कि अधिकारों की लड़ाई हर स्तर पर लड़ी जाएगी।
कोयला को लेकर दुनिया में धनबाद अलग स्थान रखता है। यहां पर जितनी पब्लिक कंपनिया हैं, आउटसोर्स के माध्यम से यह प्राइवेट कंपनियों को घुसा कर बाहर से लोग मजदूर के रूप में लाने लगे हैं।
उन्हें लगता है कि लोकल लोगों को रखेंगे तो आंदोलन होगा। लेकिन याद रखियेगा आपको 75% स्थानीय को रखना… pic.twitter.com/ZNnvw2at52— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) February 4, 2026
धनबाद। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज धनबाद थे। विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार, निजी कंपनियों और झारखंड विरोधी ताकतों पर जमकर निशाना साधा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयला नगरी धनबाद का दुनिया में अलग स्थान है, लेकिन यहां की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में आउटसोर्सिंग के जरिए निजी कंपनियों को बढ़ावा देकर बाहरी मजदूरों को लाया जा रहा है, जो राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों का हनन है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि कुछ कंपनियों को लगता है कि यदि वे स्थानीय लोगों को रोजगार देंगे तो आंदोलन खड़े हो जाएंगे। उन्होंने कहा, “याद रखिए, आपको 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रखना ही होगा।
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो झारखंड का मजदूर और युवा अपना हक और अधिकार लेकर रहेगा।” उन्होंने साफ किया कि राज्य सरकार स्थानीय नियोजन के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने झारखंड आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि यह राज्य बड़ी मेहनत और अनगिनत बलिदानों के बाद मिला है। उन्होंने कहा कि अब झारखंड विरोधी ताकतों को दोबारा सिर उठाने का मौका नहीं दिया जाएगा। “शहर से लेकर गांव तक हमें एकजुट रहना होगा। गांव भी हमारा है और शहर भी हमारा,” उन्होंने कहा।
हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड को उसके अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह झारखंड के लिए राजनीतिक संघर्ष हुआ, उसी तरह अधिकारों के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों लड़ाइयां लड़ी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को जानबूझकर गरीब और कमजोर बनाए रखने की नीति अपनाई गई, ताकि दूसरे राज्यों का विकास किया जा सके।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों में सड़कें, इमारतें और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बनते हैं, तो मजदूर कहां से आता है। “झारखंड के मजदूर देश चलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन बदले में इस राज्य को गरीबी, अशिक्षा और शोषण मिला,” मुख्यमंत्री ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि नीति-निर्धारकों की नीयत शुरू से सही होती, तो झारखंड आज देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की धरती वीरों की धरती है। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, बाबा तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष और बलिदान ने झारखंड को अलग पहचान दी है।
धनबाद को उन्होंने क्रांतिकारी धरती बताते हुए कहा कि यहां से गरीब, किसान और मजदूरों को नेतृत्व मिला और आदिवासी-मूलवासी समाज की रक्षा के लिए अनेक लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
अंत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अब “अबुआ सरकार” समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के संकल्प के साथ काम कर रही है। “हर घर को मजबूत करना हमारा लक्ष्य है।
मिलकर हम इस युवा राज्य को समृद्ध बनाएंगे,” कहते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का आह्वान किया। स्थापना दिवस का यह मंच झामुमो के लिए न सिर्फ उत्सव का अवसर बना, बल्कि अधिकारों और संघर्ष के संकल्प को दोहराने का संदेश भी देता नजर आया।








