1 अप्रैल से बदल जाएगा टैक्स का पूरा खेल! पुराने आयकर कानून की होगी विदाई, नए नियमों से कांपेंगे करदाता?
आयकर अधिनियम 2025 लागू होते ही बदलेगा ITR भरने का तरीका, देरी से रिटर्न, TDS रिफंड और TCS नियमों में बड़ा उलटफेर

नई दिल्ली।देश के करोड़ों करदाताओं के लिए 1 अप्रैल से बड़ा झटका या बड़ी राहत—यह सवाल हर किसी के मन में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में ऐलान किया कि आयकर अधिनियम 2025 को 1 अप्रैल से लागू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही पिछले 60 वर्षों से चल रहे आयकर कानून को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
नया कानून लागू होते ही आयकर नियमों और ITR फॉर्म का पूरा ढांचा बदल जाएगा, जिससे नौकरीपेशा, व्यापारी, छोटे करदाता—हर कोई प्रभावित होगा।
क्या है आयकर अधिनियम 2025 की सबसे डरावनी सच्चाई?
सरकार का दावा है कि यह कानून सरल और करदाता-हितैषी है, लेकिन असल में इसके लागू होते ही—
पुराने फॉर्म और प्रक्रियाएं खत्म
टैक्स टाइमलाइन पूरी तरह बदली
ITR, TDS, TCS से जुड़े नियमों में बड़ा फेरबदल
वित्त मंत्री ने साफ कहा कि नए आयकर नियम और रिटर्न फॉर्म जल्द अधिसूचित किए जाएंगे, ताकि लोगों को तैयारी का समय मिल सके।
अब नहीं होगा आकलन वर्ष का झंझट!
नए कानून में आकलन वर्ष और पिछले वर्ष का फर्क ही खत्म कर दिया गया है।
अब केवल एक ही होगा—
“कर वर्ष (Tax Year)”
इस बदलाव से कर प्रणाली तो आसान होगी, लेकिन शुरुआती दौर में भ्रम और गलती का खतरा भी बढ़ सकता है।
देरी से ITR भरने वालों के लिए बड़ी राहत
अब अगर आप समय सीमा के बाद भी ITR दाखिल करते हैं, तो—
TDS रिफंड मिलेगा
कोई पेनल्टी नहीं लगेगी
हालांकि, संशोधित ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, लेकिन इसके लिए मामूली शुल्क देना होगा।
विदेश जाने वालों और पढ़ाई कराने वालों के लिए खुशखबरी
सरकार ने TCS दरों में बड़ी कटौती का ऐलान किया है—
शिक्षा और मेडिकल शिक्षा पर TCS: 5% ➝ 2%
विदेशी यात्रा पैकेज पर TCS: 5% ➝ 2%
(पहले यह 20% तक था!)
मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर टैक्स नहीं!
एक और बड़ा ऐलान—
मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे को आयकर से पूरी तरह छूट दी जाएगी।
सरल या खतरनाक? विशेषज्ञों की नजर
सरकार का कहना है कि नया कानून—
50% कम धाराएं
कम मुकदमेबाजी
आसान अनुपालन
लेकिन टैक्स विशेषज्ञ मानते हैं कि शुरुआती महीनों में गलत फाइलिंग, कन्फ्यूजन और नोटिस का खतरा बना रहेगा।
1 अप्रैल के बाद आपकी एक गलती भारी पड़ सकती है!
इसलिए नए आयकर नियमों को समझना अब जरूरी नहीं, मजबूरी बन गया है।








