झारखंड- स्कूल में अश्लील डांस: शिक्षक और छात्रों ने अश्लील गाने पर किया आपत्तिजनक डांस, हेडमास्टर सहित छह शिक्षकों-कर्मचारियों पर गिरी गाज
Jharkhand: Teachers and students performed an objectionable dance to an obscene song, in which six teachers and staff, including the headmaster, were punished.

Jharkhand School News : स्कूल परिसर में अश्लील गानों पर शिक्षक और छात्रों के नाचने का वीडियो वायरल होने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रभारी प्रधानाध्यापक समेत छह कर्मियों को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया है।
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Jharkhans School Teacher News : स्कूल में अश्लील डांस पर बड़ा एक्शन हुआ है। अश्लील गानों पर डांस का वीडियो वायरल होने पर शिक्षा विभाग ने बड़ा एक्शन लियाहै। हेड मास्टर सहित छह शिक्षकों को 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया है। मामला बोकारो जिले के कसमार प्रखंड स्थित पीएम श्री एसएस प्लस टू उच्च विद्यालय का है।
दरअसल सरस्वती पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान स्कूल परिसर में अश्लील गानों पर शिक्षक और छात्र झूमते नजर आए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) जगरनाथ लोहरा ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक सहित कुल छह कर्मियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। नोटिस में 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
जिन कर्मियों से जवाब मांगा गया है, उनमें प्रभारी प्रधानाध्यापक मो. फारुख अंसारी, शिक्षक धनंजय कुमार, अशोक रजवार, प्रशांत ओझा, प्रयोगशाला सहायक रिशु कुमार और लिपिक सुदीप शर्मा शामिल हैं।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शिक्षकों और कर्मचारियों का यह आचरण निंदनीय, आपत्तिजनक और शिक्षा की गरिमा के प्रतिकूल है। इससे न केवल विद्यालय की छवि धूमिल हुई है, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंची है।
डीईओ ने अपने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि पीएम श्री एसएस प्लस टू उच्च विद्यालय, कसमार को भारत सरकार द्वारा विशेष विद्यालय (PM SHRI School) की श्रेणी में शामिल किया गया है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने यह भी चिंता जताई है कि विद्यालय में ग्रामीण पृष्ठभूमि की छात्राएं भी अध्ययनरत हैं।
इस प्रकार की अशोभनीय गतिविधियों का उन पर मानसिक और नैतिक दुष्प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही इससे अभिभावकों का सरकारी विद्यालयों पर जो भरोसा है, वह भी कमजोर होता है।डीईओ ने नोटिस में सवाल उठाया है कि क्यों न इन आरोपों के आधार पर संबंधित कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला, तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।इसके साथ ही जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि यह मामला जिला शिक्षा स्थापना समिति के समक्ष भी रखा जाएगा, क्योंकि यह प्रकरण सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
स्थापना समिति में विचार के बाद मामले को राज्य कार्यालय भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में पीजीटी और टीजीटी दोनों श्रेणी के शिक्षक शामिल हैं। टीजीटी शिक्षकों पर जिला स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है, जबकि पीजीटी शिक्षकों के मामले में अंतिम निर्णय के लिए इसे राज्य कार्यालय, माध्यमिक शिक्षा निदेशक स्तर पर प्रेषित किया जाएगा।








