BREAKING: बड़ा डिजिटल वार! 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बैन

बच्चों के दिमाग पर कब्जे की जंग तेज, स्कूलों में मोबाइल फोन भी होंगे बैन—मैक्रों का सख्त फैसला दुनिया को दिखाएगा नई राह

नई दिल्ली।डिजिटल दुनिया के खतरनाक असर को लेकर अब दुनिया सख्त फैसले लेने लगी है। ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस ने भी बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। फ्रांस की नेशनल असेंबली ने एक ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

सोमवार देर रात हुए मतदान में यह विधेयक 130-21 के भारी बहुमत से पारित हुआ, जो इस बात का संकेत है कि सरकार अब इस खतरे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।

हाई स्कूलों में भी मोबाइल फोन पूरी तरह बैन

यह कानून सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। इसके तहत हाई स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। यानी स्कूलों में अब बच्चों का ध्यान स्क्रीन पर नहीं, बल्कि पढ़ाई और मानसिक विकास पर रहेगा।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कानून को ‘फास्ट-ट्रैक’ करने की मांग की है, ताकि इसे सितंबर से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से ही लागू किया जा सके।

मैक्रों का कड़ा संदेश: बच्चों के सपने एल्गोरिदम तय नहीं करेंगे

राष्ट्रपति मैक्रों ने इस फैसले का खुलकर समर्थन करते हुए कहा,
“हमारे बच्चों के दिमाग बिक्री के लिए नहीं हैं—न अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स के लिए और न ही चीनी नेटवर्क्स के लिए। उनके सपने किसी एल्गोरिदम द्वारा तय नहीं होने चाहिए।”

यह बयान बताता है कि फ्रांस इस लड़ाई को केवल कानून नहीं, बल्कि भविष्य की जंग मान रहा है।

क्यों जरूरी हुआ इतना सख्त कानून? चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने

फ्रांस की स्वास्थ्य निगरानी संस्था की हालिया रिपोर्ट ने सरकार को झकझोर कर रख दिया। रिपोर्ट के अनुसार—

  • 12 से 17 वर्ष के करीब 90% बच्चे रोज इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं

  • इनमें से 58% किशोर सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं

  • हर दूसरा किशोर दिन में 2 से 5 घंटे स्मार्टफोन पर बिता रहा है

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया की लत से बच्चों में आत्म-सम्मान की कमी, डिप्रेशन और आत्मघाती प्रवृत्तियां तेजी से बढ़ रही हैं।

टिकटॉक पर मुकदमे, आत्महत्याओं के आरोप

फ्रांस में कई परिवारों ने TikTok जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मुकदमे भी दायर किए हैं। आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद हानिकारक कंटेंट ने उनके बच्चों को आत्महत्या की ओर धकेला। यही वजह है कि सरकार अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

यूरोप और दुनिया में बढ़ता ट्रेंड

यह विधेयक यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट के अनुरूप तैयार किया गया है।

  • पूरे यूरोप में नाबालिगों की ऑनलाइन उम्र सीमा 16 साल करने पर विचार

  • ब्रिटेन भी सोशल मीडिया बैन की तैयारी में

  • ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के 47 लाख अकाउंट बंद कर चुका है

किन प्लेटफॉर्म्स पर नहीं लगेगा बैन?

हालांकि कानून सख्त है, लेकिन इसमें कुछ अपवाद भी रखे गए हैं।

  • विकिपीडिया जैसे ऑनलाइन विश्वकोश

  • शैक्षिक और वैज्ञानिक प्लेटफॉर्म

  • ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर साइट्स

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा का ऐतिहासिक कदम

हालांकि विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताया है, लेकिन बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट को देखते हुए इस कानून को फ्रांस की ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

अब बड़ा सवाल यही है—
क्या भारत समेत बाकी देश भी बच्चों को डिजिटल जाल से बचाने के लिए ऐसा कड़ा फैसला लेंगे?

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