झारखंड: अब म्यूटेशन के लिए नहीं करना होगा अलग से आवेदन, साफ्टवेयर में हो रहा बड़ा अपडेट, रजिस्ट्री के पेपर सीधे सीओ के लॉगिन में पहुंचेंगे

Jharkhand: No need to apply separately for mutations; major software update underway, registry papers will be directly accessed through the CO's login.

Jharkhand News : झारखंड में जमीन खरीदने वाले रैयतों को अब दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए परेशान नहीं होना होगा। अब म्यूटेशन के लिए अलग से आवेदन की जरूरत नहीं है।



नया अपडेट ये आया है कि अब झारभूमि सॉफ्टवेयर के अपग्रेड होने के बाद रजिस्ट्री के साथ ही म्यूटेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिससे दोबारा आवेदन और अनावश्यक रिजेक्शन पर रोक लगेगी।

राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग झारभूमि सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने जा रहा है, जिसके बाद म्यूटेशन की पूरी प्रक्रिया स्वतः और अधिक पारदर्शी हो जाएगी। यह नई व्यवस्था अगले दो से तीन महीनों में लागू होने की संभावना है।

भूमि सुधार उप समाहर्ता प्यारेलाल ने बताया कि सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के बाद राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) के माध्यम से रजिस्ट्री से जुड़े सभी दस्तावेज स्वतः संबंधित अंचलाधिकारी (सीओ) के लॉग-इन में उपलब्ध हो जाएंगे।

इसका सीधा लाभ यह होगा कि रजिस्ट्री होते ही म्यूटेशन की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाएगी और रैयतों को प्रज्ञा केंद्र या साइबर कैफे जाकर अलग से आवेदन नहीं करना पड़ेगा।फिलहाल व्यवस्था यह है कि जमीन खरीदने के बाद रैयत म्यूटेशन के लिए दोबारा आवेदन कर देते हैं। कई बार एनजीडीआरएस से पहले ही दस्तावेज सीओ के पास पहुंच चुके होते हैं, इसके बावजूद दोहरा आवेदन हो जाता है।

ऐसे मामलों में सीओ को यह जांच करनी पड़ती है कि म्यूटेशन का आवेदन पहले से आया है या नहीं। अगर दोहरा आवेदन होता है, तो उसे निरस्त करना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों की अनावश्यक बर्बादी होती है।

अपग्रेडेड झारभूमि सॉफ्टवेयर में यदि कोई व्यक्ति म्यूटेशन के लिए दोबारा आवेदन करने की कोशिश करेगा, तो मौजा, प्लॉट या खाता नंबर डालने के बाद भी आवेदन स्वीकार नहीं होगा।

इससे रिपीट आवेदन पूरी तरह बंद हो जाएंगे। राजस्व विभाग का कहना है कि म्यूटेशन के बार-बार आवेदन से झारभूमि वेबसाइट पर अतिरिक्त तकनीकी दबाव पड़ता है और आंकड़ों में स्वीकृत मामलों की तुलना में रिजेक्ट केस ज्यादा दिखते हैं, जिससे विभाग की छवि प्रभावित होती है। नई व्यवस्था से यह समस्या खत्म हो जाएगी।

नई प्रणाली में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि यदि म्यूटेशन का मामला सीओ लॉग-इन से रिजेक्ट होता है, तो रैयत दोबारा आवेदन नहीं कर सकेंगे। ऐसे मामलों में उन्हें भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) के पास अपील करनी होगी।

डीसीएलआर से स्वीकृति मिलने के बाद ही सीओ म्यूटेशन कर पाएंगे। इससे सीओ को भी म्यूटेशन निरस्त करने से पहले अधिक सावधानी बरतनी होगी और अनावश्यक निरस्तीकरण के मामलों में कमी आएगी।

इसके अलावा, विभाग 2008 से पहले के डीड के आधार पर म्यूटेशन पर रोक लगाने जा रहा है। नए सॉफ्टवेयर में ऐसे मामलों के लिए ऑनलाइन आवेदन का विकल्प ही उपलब्ध नहीं रहेगा। रैयतों को पहले संबंधित विभाग से स्वीकृति लेनी होगी। इससे पुराने दस्तावेजों के आधार पर गलत तरीके से जमीन की खरीद-बिक्री और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे पर रोक लगेगी।

झारभूमि सॉफ्टवेयर के अपग्रेड होने के बाद म्यूटेशन मामलों में पड़ोसी रैयतों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी। अब वे ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकेंगे और बता सकेंगे कि दस्तावेजों में क्या त्रुटि है या कौन सा दावा गलत है। पहले यह अधिकार केवल हल्का कर्मचारी के पास था। इससे जमीन से जुड़े विवादों की जानकारी समय रहते सामने आ सकेगी।

एक और अहम बदलाव यह है कि अपग्रेडेड सिस्टम में सीओ को एनजीडीआरएस से आए दस्तावेजों में तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियों को सुधारने का अधिकार मिलेगा। वर्तमान में त्रुटि सुधार की कोई सुविधा नहीं है, जिसके कारण कई बार म्यूटेशन निरस्त करना पड़ता है। नई व्यवस्था से ऐसे मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

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