रांची: स्कूल में मच गया कोहराम, दौड़ते-चिल्लाते घुस गया लकड़बग्घा, लोगों के खड़े हो गये रौंगटे, फिर वन विभाग ने …
Ranchi: Chaos erupted at a school as a hyena ran in, causing panic and sending shivers down people's spines. The forest department then intervened...

रांची। स्कूल में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक लकड़बग्घा स्कूल में घुस आया। हालांकि वन विभाग की सक्रियता से लकड़बग्घा का रेस्क्यू कर लिया गया है। पूरा मामला रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर सिल्ली थाना क्षेत्र में रिहायशी इलाके की है, जहां लकड़बग्घा घुस आने से हड़कंप मच गया।
लकड़बग्घे को एक सरकारी स्कूल के स्टोर रूम से सुरक्षित रेस्क्यू कर ओरमांझी स्थित बिरसा मुंडा चिड़ियाघर में शिफ्ट किया। दरअल एक लकड़बग्घा अचानक रिहायशी इलाके में घुस आया।
सुबह के समय लकड़बग्घे को इधर-उधर दौड़ते और गलियों में भागते देख स्थानीय लोग दहशत में आ गए। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस और वन विभाग को इसकी सूचना दी।
वन विभाग हरकत में आया और रांची से विशेषज्ञों की टीम मौके के लिए रवाना की गई। इस बीच लकड़बग्घा पतराहातू गांव स्थित एक सरकारी स्कूल परिसर में पहुंच गया और वहां बने स्टोर रूम में जाकर छिप गया। स्कूल परिसर में वन्यजीव के घुसने की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों में भारी भीड़ जुट गई। लोग उत्सुकता और डर के बीच स्कूल के बाहर जमा हो गए, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।
रांची के डीएफओ श्रीकांत ने बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम को मौके पर तैनात किया गया। लकड़बग्घे को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ने के लिए विशेष केज मंगाया गया। टीम ने सावधानीपूर्वक पूरे इलाके को घेराबंदी में लिया और लोगों से दूरी बनाए रखने की अपील की। काफी मशक्कत के बाद लकड़बग्घे को सुरक्षित रूप से केज में कैद कर लिया गया।
डीएफओ श्रीकांत ने बताया कि लकड़बग्घा पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है। उसे रेस्क्यू के बाद ओरमांझी स्थित बिरसा मुंडा जैविक उद्यान (जू) में शिफ्ट किया गया है, जहां विशेषज्ञ उसकी स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की चोट या बीमारी के संकेत नहीं मिले हैं।
राहत की बात यह रही कि लकड़बग्घे ने किसी भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही लोगों को उसके आने की जानकारी मिली, कुछ लोग डर के मारे उसे खदेड़ने की कोशिश करने लगे थे। वन विभाग का कहना है कि इस तरह की प्रतिक्रिया से जानवर आक्रामक हो सकता है और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिस क्षेत्र से लकड़बग्घे को रेस्क्यू किया गया है, वह पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ इलाका है। माना जा रहा है कि जंगल क्षेत्र में भोजन या रास्ता भटकने के कारण वह रिहायशी इलाके में आ गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों के पास बसे इलाकों में इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने और वन विभाग को तुरंत सूचना देने की जरूरत है।
गौरतलब है कि इसी क्षेत्र से करीब पांच किलोमीटर दूर जून 2025 में एक बाघ को भी रेस्क्यू किया गया था। उस समय बाघ जंगल से निकलकर सिल्ली थाना क्षेत्र के मारदू गांव में एक घर में घुस गया था, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। तब भी वन विभाग की टीम ने सफलतापूर्वक बाघ को रेस्क्यू कर पहले ओरमांझी जू में इलाज कराया और बाद में पलामू टाइगर रिजर्व में छोड़ दिया था।









