झारखंड- शिक्षकों की खबर : झारखंड- शिक्षकों के 3704 पद सरेंडर, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, उधर, पदस्थापना के लिए भटक रहे हैं 166 शिक्षक

Jharkhand Teachers News: 3704 teacher posts surrendered in Jharkhand; High Court seeks response from the government, while 166 teachers are still waiting for their postings.

Jharkhand Teacher News: झारखंड हाईकोर्ट में हाई स्कूल शिक्षकों के 3,704 पद सरेंडर किए जाने के खिलाफ सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने सरकार और जेएसएससी से जवाब मांगा है। वहीं रांची में अंतर जिला तबादले से आए 166 शिक्षकों को छह महीने बाद भी स्कूल नहीं मिलने से प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

झारखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अहम मुद्दे इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। एक ओर हाई स्कूल शिक्षकों के हजारों पद सरेंडर किए जाने का मामला झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, तो दूसरी ओर अंतर जिला तबादले से रांची आए सैकड़ों शिक्षक महीनों से बिना पदस्थापन के भटकने को मजबूर हैं। दोनों ही मामलों में शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

झारखंड हाईकोर्ट में हाई स्कूल शिक्षकों के 3,704 पदों को सरेंडर किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से स्पष्ट जवाब तलब किया है।

अदालत ने पूछा है कि आखिर इन पदों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया है या फिर सिर्फ इस आधार पर खाली छोड़ा गया है कि वर्तमान में योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हैं।

यह याचिका लीला मुर्मू और अन्य की ओर से दाखिल की गई है। प्रार्थियों की तरफ से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि वर्ष 2016 में हाई स्कूल शिक्षकों के कुल 17,786 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। बाद में आरक्षित वर्ग से संबंधित 3,704 पदों को बिना किसी ठोस कारण के सरेंडर कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कदम न केवल राज्य की आरक्षण नीति के खिलाफ है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समान अवसर के अधिकार का भी उल्लंघन करता है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए आठ सप्ताह बाद अगली सुनवाई तय की है। इसी बीच, राजधानी रांची में अंतर जिला तबादले से आए 166 सहायक शिक्षकों का मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है।

इन शिक्षकों को छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी स्कूल में पदस्थापित नहीं किया गया है। जबकि प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि तबादले के 15 दिनों के भीतर शिक्षकों को विद्यालय आवंटित कर पदस्थापन सुनिश्चित किया जाए।

हैरानी की बात यह है कि राज्य के 24 जिलों में से 19 जिलों ने समय पर तबादला प्राप्त शिक्षकों की पदस्थापना कर दी है, लेकिन रांची सहित पांच जिलों—रांची, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और एक अन्य—में आज भी शिक्षक बिना स्कूल के हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या रांची जिले की बताई जा रही है।

शिक्षकों का आरोप है कि जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) कार्यालय से संपर्क करने पर केवल आश्वासन ही मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती। पदस्थापन में हो रही यह देरी शिक्षकों के अनुसार अब प्रशासनिक टालमटोल का रूप ले चुकी है। न तो कोई स्पष्ट समय-सीमा बताई जा रही है और न ही देरी का कारण।

शिक्षक संगठनों ने इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करने वाला कदम बताया है। शिक्षक संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि बीमारी, दिव्यांगता और पारिवारिक मजबूरी जैसे मानवीय आधार पर अंतर जिला तबादला किया गया था, लेकिन अब पदस्थापन नहीं मिलने से शिक्षक गंभीर संकट में हैं।

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