आस्था, संस्कृति और प्रकृति का संगम… मकर संक्रांति पर पीएम मोदी की गौ-सेवा…तस्वीरों ने देश का दिल जीत लिया…

मकर संक्रांति 2026: लोक कल्याण मार्ग पर दिखा अलग ही नज़ारा, पीएम मोदी ने गायों को खिलाया चारा

नई दिल्ली:मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जब पूरा देश दान, स्नान और उत्सव में डूबा हुआ था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा दृश्य रचा जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर पीएम मोदी ने गौ सेवा करते हुए अपनी गायों को चारा खिलाया—और यह पल देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया।

पीएम मोदी जब बाहर लॉन में गायों को चारा खिला रहे थे, तो वहां मौजूद माहौल बेहद भावुक और सांस्कृतिक नजर आया। गायों को पारंपरिक त्योहारों के अनुरूप सजावटी वस्त्रों से सजाया गया था, जिससे पूरा दृश्य भारतीय परंपरा और आस्था की गहराई को दर्शा रहा था।

 ‘यह सिर्फ त्योहार नहीं, प्रकृति से जुड़ने का अवसर है’

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह पर्व पूरे भारत में अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं के साथ मनाया जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का यह दिन फसल कटाई, नई ऊर्जा और आभार का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि संक्रांति हमें प्रकृति, धरती और मेहनतकश किसानों के प्रति कृतज्ञता का भाव सिखाती है।

 गौ सेवा के पीछे छिपा गहरा संदेश

पीएम मोदी की यह गौ सेवा सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और प्रकृति के संतुलन का संदेश देती नजर आई। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों और वीडियो ने तेजी से जगह बना ली और लोगों ने इसे भारतीय मूल्यों से जुड़ा एक भावुक क्षण बताया।

 पोंगल समारोह में भी दिखा पीएम का सांस्कृतिक जुड़ाव

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित पोंगल समारोह में भी शामिल हुए थे। उन्होंने पोंगल को दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं की झलक दिखाने वाला ग्लोबल त्योहार बताया।
केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में तमिल समाज के कई प्रमुख चेहरे मौजूद थे। पीएम ने कहा कि पोंगल किसानों की मेहनत का उत्सव है और धरती व सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है।

‘पोंगल अब दुनिया का त्योहार बन चुका है’

पीएम मोदी ने कहा कि पोंगल प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने का संदेश देता है और आज यह केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया भर में बसे तमिल समुदाय के लिए गर्व का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आभार केवल शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए—जब धरती हमें इतना कुछ देती है, तो उसे संजोना और बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

 मकर संक्रांति पर पीएम मोदी की गौ सेवा और सांस्कृतिक संदेश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उनके लिए परंपरा, प्रकृति और संस्कृति सिर्फ विचार नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा हैं।

Related Articles