बंगाल में मौत का साया! जानलेवा निपाह वायरस की दस्तक से हड़कंप—दो संदिग्ध केस, केंद्र हाई अलर्ट पर
40 से 75% मौत की दर वाले वायरस ने बढ़ाई चिंता, AIIMS–NIV की टीमें मैदान में, ममता सरकार को सख्त चेतावनी

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में एक बार फिर जानलेवा निपाह वायरस (Nipah Virus) की आहट ने देशभर में डर का माहौल पैदा कर दिया है। AIIMS कल्याणी स्थित ICMR की वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (VRDL) में दो संदिग्ध मामले सामने आते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वायरस की उच्च मृत्यु दर और तेज़ी से फैलने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस मामले को ‘अत्यधिक प्राथमिकता’ (Utmost Priority) पर रखा है।
सूत्रों के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को जैसे ही इन संदिग्ध मामलों की पुष्टि हुई, पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति बन गई। केंद्र सरकार ने तुरंत हरकत में आते हुए राज्य को सतर्क रहने के निर्देश दिए और विशेषज्ञों की राष्ट्रीय टीम बंगाल रवाना कर दी।
केंद्र हाई अलर्ट पर, ममता सरकार को पूरा सहयोग
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर बातचीत कर स्थिति की गंभीरता पर चर्चा की और तकनीकी व लॉजिस्टिक सहयोग का भरोसा दिया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव ने बंगाल के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर तात्कालिक एक्शन प्लान तय किया।
दिल्ली स्थित NCDC में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर को भी सक्रिय कर दिया गया है। केंद्र ने साफ निर्देश दिए हैं कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, आइसोलेशन और संक्रमण रोकने के सभी प्रोटोकॉल बिना किसी ढिलाई के लागू किए जाएं।
नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम मैदान में
केंद्र की ओर से भेजी गई नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम में देश के शीर्ष संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं—
कोलकाता का ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड पब्लिक हाइजीन
पुणे का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV)
चेन्नई का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NIE)
AIIMS कल्याणी
वाइल्डलाइफ विभाग (पर्यावरण मंत्रालय के तहत)
टीम यह भी जांच कर रही है कि कहीं यह वायरस जानवरों से इंसानों में (Zoonotic Transmission) तो नहीं फैल रहा।
क्यों खतरनाक है निपाह वायरस?
निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से इंसानों में फैलती है। इसकी भयावहता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 40% से 75% तक हो सकती है। यही वजह है कि जैसे ही बंगाल में इसके संदिग्ध केस सामने आए, पूरे सिस्टम को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया।
सवाल जो डर बढ़ा रहे हैं…
क्या ये सिर्फ दो संदिग्ध मामले हैं या आने वाले खतरे की शुरुआत?
क्या वायरस ने स्थानीय स्तर पर पैर पसार लिए हैं?
क्या बंगाल एक बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रहा है?


















