200 साल पुराने ‘पाप’ को धोने का ऐलान…पीएम मोदी का युवाओं को खुला चैलेंज…अब बदलेगा भारत का माइंडसेट?

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार बढ़ी, युवाओं के कंधों पर विकसित भारत की सबसे बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में ऐसा बयान दिया, जिसने देश की सोच, शिक्षा और भविष्य—तीनों को झकझोर कर रख दिया। पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए अब गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलना होगा, वरना विकास सिर्फ एक सपना बनकर रह जाएगा।

उन्होंने कहा कि ‘नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स’ से शुरू हुआ सफर अब ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ में बदल चुका है और इसके केंद्र में देश की युवा शक्ति है। पीएम मोदी ने युवाओं को चेताया कि अगर आज आत्मविश्वास और अपनी विरासत पर गर्व नहीं होगा, तो 2047 का सपना अधूरा रह जाएगा।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने भाषण के वीडियो साझा करते हुए लिखा कि बीते 11 वर्षों में देश के हर सेक्टर में संभावनाओं के नए दरवाज़े खुले हैं। उन्होंने खास तौर पर कंटेंट और क्रिएटिविटी सेक्टर का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज के युवा रामायण और महाभारत जैसी गौरवशाली कथाओं को भी गेमिंग वर्ल्ड का हिस्सा बना सकते हैं।
यहां तक कि उन्होंने कहा—

“हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं।”

यह बयान युवाओं के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

 ‘मैकाले की मानसिकता’ पर सबसे कड़ा हमला

पीएम मोदी ने अपने भाषण में सबसे सख्त शब्द मैकाले की मानसिकता को लेकर कहे। उन्होंने कहा कि दस साल बाद मैकाले के उस दुस्साहस को 200 साल पूरे हो जाएंगे, और आज की युवा पीढ़ी के पास सिर्फ 10 साल हैं उस “200 साल पुराने पाप” को धोने के लिए।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया—

“ये पीढ़ी मैकाले के उस पाप को धोकर के रहेगी।”

इस बयान ने पूरे कार्यक्रम का माहौल गंभीर और भावनात्मक बना दिया।

 2047 का लक्ष्य: युवाओं के हाथों में भारत का भविष्य

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देश-विदेश से आए करीब 3000 युवा नेताओं से सीधा संवाद किया। युवाओं ने राष्ट्रीय महत्व के 10 प्रमुख विषयों पर अपनी प्रस्तुतियां भी दीं।

पीएम मोदी ने कहा कि 2047, जब भारत आज़ादी के 100 साल पूरे करेगा, वही समय युवाओं के जीवन का भी सबसे अहम दौर होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया—
“आपका सामर्थ्य भारत का सामर्थ्य बनेगा, और आपकी सफलता भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।”

 आख़िरी संदेश—या आने वाले बदलाव की चेतावनी?

प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में जिला स्तर पर भी ‘यंग लीडर्स डायलॉग’ शुरू किए जाएंगे, ताकि राज्यों के युवा मिलकर एक ‘थिंक वेब’ तैयार कर सकें।

यह भाषण सिर्फ प्रेरणा नहीं, बल्कि एक चेतावनी, एक चुनौती और एक जिम्मेदारी है—
अब सवाल यह है कि
 क्या युवा इस ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को सही दिशा में ले जा पाएंगे?
 क्या सच में 200 साल पुरानी मानसिक गुलामी टूट पाएगी?

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