मुंबई चुनाव 2026: महायुति का घोषणापत्र – BEST बसों में महिलाओं के लिए 50% छूट…शहर को रोहिंग्या और बांग्लादेशियों से ‘मुक्त’ करने का सनसनीखेज वादा…
महायुति ने मतदान से ठीक 4 दिन पहले पेश किया अपने चुनावी मिशन का विस्तार, शहर के पानी, परिवहन और संस्कृति को लेकर किए बड़े ऐलान

मुंबई। BMC चुनावों के पहले माहौल और भी गर्म हो गया है। रविवार, 11 जनवरी 2026 को महायुति ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और आरपीपी प्रमुख रामदास आठवले की मौजूदगी में अपना घोषणापत्र जारी किया, जो शहरवासियों के लिए कई बड़े और विवादास्पद वादे लेकर आया है।
घोषणापत्र में मुंबई को 2034 तक एक विकसित महानगर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पानी, परिवहन, मार्केट, रोजगार और मराठी संस्कृति से जुड़े ऐलान सीधे लोगों की जीवनशैली और भावनाओं को छूते हैं।
मुंबई चुनाव 2026:पानी और पर्यावरण पर बड़ा फोकस
महायुति ने अगले पांच सालों में गरगई, पिंजल और दमनगंगा प्रोजेक्ट को पूरा करने का वादा किया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए 17,000 करोड़ रुपये की योजना घोषित की गई है। मछुआरों और व्यापारियों को लाभ पहुंचाने के लिए कोल्ड स्टोरेज और मछली इंपोर्ट-एक्सपोर्ट सेंटर की भी घोषणा की गई।
मुंबई चुनाव 2026:BEST बसों में महिलाओं को 50% छूट
महायुति ने शहर की परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बस सेवा में बदलने का लक्ष्य रखा है। BEST बसों की संख्या 5,000 से बढ़ाकर 10,000 करने और महिलाओं को 50% किराया छूट देने का ऐलान किया गया है।
मुंबई चुनाव 2026:रोजगार, उद्योग और आत्मनिर्भर बहनें
स्मॉल स्केल इंडस्ट्री पॉलिसी, स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर और 5 लाख रुपये तक बिना ब्याज के लोन देने की घोषणा भी की गई है।
विवादास्पद वादे – रोहिंग्या और बांग्लादेशियों से मुक्त मुंबई
घोषणापत्र ने सबसे ज्यादा सनसनी तब मचाई जब शहर को रोहिंग्या और बांग्लादेशियों से मुक्त करने का वादा दोहराया गया। इसके साथ ही मराठी भाषा और संस्कृति को मजबूत करने के लिए अलग विभाग, आर्ट सेंटर और अध्ययन केंद्र बनाने की योजना पेश की गई।
मुंबई चुनाव 2026:टूरिज्म और संस्कृति के लिए बड़े प्रोजेक्ट
टूरिज्म बढ़ाने के लिए अलग डिपार्टमेंट, हुतात्मा स्मारक चौक पर वर्ल्ड क्लास म्यूजियम, रीडेवलपमेंट और नए थिएटरों की घोषणा की गई।
घोषणापत्र ने स्पष्ट कर दिया है कि महायुति चुनाव में केवल वोट मांगने नहीं बल्कि शहर का भविष्य और संस्कृति दोनों को लेकर बड़े और साहसिक वादे लेकर आई है। लेकिन सवाल ये है – क्या ये वादे सच होंगे या सिर्फ चुनावी रणनीति?


















