भारत के इस राज्य में हर दिन एक नई मिठाई का जादू…जहां जन्मे रसगुल्ले के रोचक राज…

पश्चिम बंगाल को सिर्फ सुंदर नज़ारों और संस्कृति के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि मिठाइयों के घर के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहां हर दिन किसी न किसी नई मिठाई का आविष्कार होता है, जो स्वाद और इनोवेशन का अनोखा संगम पेश करती है।

 रसगुल्ले का जन्म

1868 में कोलकाता के बाग बाजार में नविन चंद्र दास ने नरम और स्पंजी रसगुल्ले का आविष्कार किया। उनके इनोवेशन ने छेना से बनी मिठाइयों की दुनिया बदल दी और उन्हें ‘रसगुल्ले का कोलंबस’ का खिताब दिलाया।

2017 में पश्चिम बंगाल को बांग्लार रसगुल्ला के लिए ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिला, जिससे इसकी मूल पहचान और खासियत को आधिकारिक मान्यता मिली। 14 नवंबर को बंगाल में इसे रसगुल्ला दिवस के रूप में मनाया जाता है।

 बंगाल की विविध मिठाइयाँ

पश्चिम बंगाल सैकड़ों पारंपरिक मिठाइयों का घर है:

  • संदेश

  • मिष्टि दोई

  • चम्मच

  • लेडीकेनी

  • पोंटुआ

  • सीता भोग

  • मिहीदाना

बंगाली हलवाई इनोवेशन के लिए मशहूर हैं। यहां बेक्ड रसगुल्ले, चॉकलेट संदेश, मैंगो जेलैटो संदेश और फलों से बनी मिठाइयां आसानी से बाजार में मिलती हैं।

 मिठाई बनाना सिर्फ व्यवसाय नहीं

बंगाल में मिठाई बनाना पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी है। अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी खास मिठाइयाँ हैं:

  • शक्तिगढ़ का लेंगचा

  • बर्धमान का सीता भोग

ये मिठाइयाँ सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति और परंपरा की पहचान भी हैं।

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