ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ा फैसला! रूस से आ रही आसमान की मौत…भारत खरीदेगा R-37 की 300 मिसाइलें…दुश्मन पर 200 KM दूर से होगा वार…
IAF को मिलेगी Very Long Range Air-to-Air ताकत, Su-30MKI बनेंगे एयर डॉमिनेंस किंग

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हवाई निगरानी, स्टैंड-ऑफ प्लेटफॉर्म और लंबी दूरी से आने वाले खतरों ने भारतीय वायुसेना (IAF) को एक अहम सबक दिया है। अब भारत अपनी Very Long Range Air-to-Air क्षमता को तेजी से मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है। इसी कड़ी में भारत रूस से R-37 मिसाइलों की बड़ी खरीद की तैयारी में है।
रूस से 300 R-37 मिसाइलें खरीदने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, भारत और रूस के बीच Su-30MKI लड़ाकू विमानों के लिए R-37 मिसाइलों को लेकर बातचीत चल रही है। शुरुआती चरण में भारतीय वायुसेना करीब 300 R-37 मिसाइलों की सीधी खरीद पर विचार कर रही है, ताकि हालिया ऑपरेशनों में सामने आई तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इसके साथ ही भविष्य में भारत में निर्माण (Make in India) की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।
200 KM से ज्यादा मारक क्षमता, हाई-वैल्यू टारगेट निशाने पर
R-37 एक बेहद घातक Very Long Range Air-to-Air मिसाइल है, जिसकी रेंज 200 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है।
यह खास तौर पर—
AWACS
एयर टैंकर
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान
स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक प्लेटफॉर्म
जैसे हाई-वैल्यू एयर टारगेट को मार गिराने के लिए डिजाइन की गई है। ऐसे ही प्लेटफॉर्म ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन की ताकत का बड़ा आधार थे।
एक Su-30MKI में लगेंगी 8 मिसाइलें
रूसी पक्ष के अनुसार, एक Su-30MKI को अधिकतम एयर-टू-एयर कॉन्फिगरेशन में 8 R-37 मिसाइलों से लैस किया जा सकता है।
इससे भारतीय वायुसेना को दुश्मन के हवाई प्लेटफॉर्म को सीमा से काफी दूर ही रोकने और बड़े इलाके में एयर डिनायल की जबरदस्त क्षमता मिलेगी।
ऑपरेशन सिंदूर जैसे हालात में बनेगी ढाल
सूत्रों का कहना है कि R-37 की तैनाती से IAF उन हालातों में भी प्रभावी जवाब दे सकेगी, जहां दुश्मन लंबी दूरी से निगरानी और हमले की कोशिश करता है।
पहले चरण में सीधी खरीद के बाद, ऑपरेशनल अनुभव और लागत के आधार पर देश में उत्पादन पर फैसला लिया जा सकता है।
Astra Mk-II के साथ दोहरी रणनीति
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सरकार ने स्वदेशी Astra Mk-II मिसाइल की खरीद के लिए AoN (Acceptance of Necessity) को मंजूरी दी है।
Astra Mk-II की अनुमानित रेंज भी करीब 200 किलोमीटर है और इसके 600–700 मिसाइलों के उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।
तुरंत ताकत, लंबे समय में आत्मनिर्भरता
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना अब दोहरी रणनीति पर काम कर रही है—
तुरंत जरूरतों के लिए R-37 जैसी तैयार और आजमाई हुई मिसाइल
लंबी अवधि में आत्मनिर्भरता के लिए Astra Mk-II
अगर R-37 का सौदा पूरा होता है, तो Su-30MKI की भूमिका एक लॉन्ग-रेंज एयर डॉमिनेंस फाइटर के रूप में और मजबूत हो जाएगी, जिससे भारत की हवाई सुरक्षा को निर्णायक बढ़त मिलेगी।



















