सरकार का बड़ा खुलासा: राशन का नया फ़ॉर्मूला लागू…जानिए कैसे आपकी थाली में छिपा है राजनीतिक खेल….

नई दिल्ली: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जन-वितरण प्रणाली (PDS) में सरकार ने जनवरी 2026 से लागू होने वाला नया फ़ूड फॉर्मूला घोषित कर दिया है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और आम जनता में भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार इसे ‘बेहतर पोषक संतुलन’ बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे राशन में किए गए बदलाव का जाल करार दे रहा है। नए नियमों के मुताबिक, लाभुक परिवारों को अब 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल मिलेगा। पहले यह मात्रा 7 किलो गेहूं और 28 किलो चावल थी।
पीएचएच लाभुकों के लिए भी नया अनुपात तय किया गया है, जिसमें प्रति व्यक्ति 5 किलो खाद्यान्न (2 किलो गेहूं + 3 किलो चावल) मिलेगा। पहले यह अनुपात 1:4 था। विशेषज्ञ इसे सरकार की रणनीतिक चाल बता रहे हैं, लेकिन विपक्ष का तर्क है कि चावल की कटौती गरीब परिवारों के लिए चिंता का कारण बन सकती है।
विभाग का कहना है कि बदलाव का उद्देश्य संतुलित वितरण और खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। मगर जमीनी राजनीति में इसे राशन की थाली में खेल और जनता की नाराज़गी से जोड़ा जा रहा है।
2026 का नया राशन फ़ॉर्मूला अभी से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। कहीं इसे जनहित का फैसला कहा जा रहा है, तो कहीं इसे थाली की तस्कीन में तंगी बताया जा रहा है। एक बात तय है, इस बार राशन की राजनीति सियासी मंचों पर आग की तरह फैलने वाली है।








