शिक्षा पर संकट! झारखंड की 2.50 लाख छात्राओं की स्कॉलरशिप अटकी, आखिर पोर्टल बंद होने के पीछे क्या है वजह?
Education in crisis! Scholarships for 250,000 female students in Jharkhand are stuck. What is the reason behind the portal's closure?

वित्तरहित संस्थानों में पढ़ने वाली ढ़ाई लाख छात्राओं को सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना का लाभ आखिर क्यों नहीं मिला है. क्या पोर्टल की तकनीकी खामी या सरकारी निर्देश की कमी के कारण नौवीं से बारहवीं तक की छात्राओं को मिलने वाली 2,500 से 5,000 की छात्रवृत्ति रुक गई है?
हिंदी दैनिक हिंदुस्थान में छपी रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड राज्य में वित्तरहित संस्थानों में पढ़ने वाली लगभग 2.50 लाख छात्राओं को इस समय सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. वित्तरहित संस्थान माने ये वे शैक्षणिक संस्थान होते हैं जिन्हें राज्य सरकार या केंद्र सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या अनुदान प्राप्त नहीं होता है.
बता दें कि पूरे राज्य में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 390 वित्तरहित संस्थान है. जिनमें इंटर कॉलेज की संख्या 126, हाई स्कू 209, संस्कृति विद्यालय 30 और मदरसा 25 है. बहरहाल, इन संस्थानों की नौवीं, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा की छात्राओं को छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है, क्योंकि इसके लिए आवश्यक पोर्टल ही नहीं खुल पा रहा है.
2.5 लाख छात्राओं को नहीं मिला है लाभ!
गौरतलब है कि सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के अंतर्गत, आठवीं और नौवीं की छात्राओं को 2,500-2,500 दिए जाते हैं, जबकि दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं की छात्राओं को 5,000-5,000 दिए जाते हैं. इन लाभों के अतिरिक्त, जब संबंधित छात्रा 18 वर्ष की हो जाती है, तो उसे एकमुश्त 20,000 की राशि प्रदान की जाती है. वर्तमान में, राज्य सरकार ने सभी छात्र-छात्राओं का विवरण ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर अपलोड किया है. सरकार की ओर से अभी सिर्फ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की छात्राओं को ही इस योजना का लाभ देने का निर्देश दिया गया है, और उन्हें इसका लाभ मिलना शुरू भी हो गया है. हालांकि, वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के लिए फिलहाल कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है.
JEPC को भेजा गया है पत्र
वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस विषय पर माध्यमिक शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) को पत्र लिखा है. माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने भी इस संबंध में अविलंब वस्तुस्थिति स्पष्ट करने को कहा है. JEPC के अधिकारियों का मानना है कि महिला, बाल, विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से निर्देश मिलने के बाद ही पोर्टल में वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के लिए लिंक खोल दिया जाएगा.









