धमाके से दहला स्टेशन! रुकी हुई ट्रेन में पीछे से घुसी मंगलौर मेल…बोगियां चीरकर निकल गईं …चारों ओर लाशें…चीखें और धुआं…

चेन्नई के पेरंबूर स्टेशन पर दिल दहला देने वाला हादसा: जब स्टेशन पर खड़ी ट्रेन को पीछे से टक्कर मार गई ‘मंगलौर मेल’

चेन्नई: यह शाम किसी और दिन जैसी ही लग रही थी — प्लेटफार्म नंबर 4 पर ट्रेन धीरे-धीरे रुक रही थी, यात्री उतर रहे थे, और राहत की सांस ले रहे थे कि मंजिल आ गई। लेकिन अगले ही पल सबकुछ बदल गया। एक जोरदार धमाका, तेज झटका, और पल भर में स्टेशन का सन्नाटा चीखों में बदल गया।

यह हादसा 31 अक्टूबर 1970 को चेन्नई (तब मद्रास) के पेरंबूर रेलवे स्टेशन पर हुआ था, जिसे दक्षिण भारत के सबसे भयावह रेल हादसों में गिना जाता है।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा

शाम करीब 7 बजे कोचिन मेल प्लेटफार्म नंबर 4 पर खड़ी थी। ट्रेन मरम्मत के लिए रोकी गई थी और यात्री उतर रहे थे। तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रही मद्रास-मंगलौर मेल उसी ट्रैक पर आ पहुंची — और देखते ही देखते पीछे से कोचिन एक्सप्रेस में जोरदार टक्कर मार दी।

धमाका इतना तेज था कि यात्रियों के शरीर छिटककर प्लेटफार्म पर जा गिरे।
चारों ओर खून, टूटे सामान, और मदद की पुकारें गूंजने लगीं।

भयावह मंजर: इंजन और बोगियां पटरी से उतरीं

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि

  • कोचिन मेल की तीन बोगियां पटरी से उतर गईं,

  • जबकि मंगलौर मेल का इंजन और दो कोच पूरी तरह तबाह हो गए।
    हादसे के बाद चारों ओर धुआं और अंधेरा छा गया।

बचाव दल को शाम होने की वजह से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। घायलों को नजदीकी जनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस हादसे में 16 लोगों की मौत और 200 से अधिक यात्री घायल हुए।

रेल यातायात ठप, सैकड़ों ट्रेनें डायवर्ट

मंगलौर मेल और कोचिन मेल — ये दोनों ट्रेनें दक्षिण भारत के तटीय इलाकों को जोड़ने वाली अहम लाइनें थीं। हादसे के बाद रेलवे ने कई ट्रेनों को रद्द या डायवर्ट कर दिया। स्टेशन पर अफरातफरी मच गई थी। दक्षिण रेलवे के महाप्रबंधक ने तुरंत जांच के आदेश जारी किए।

जांच में सामने आई चौंकाने वाली वजह

प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह सिग्नल फेल होना बताई गई।
यह वर्ष 1970 में दक्षिण रेलवे पर हुई चौथी बड़ी दुर्घटना थी।
सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5,000 मुआवजे की घोषणा की।

आंखों देखा हाल बना आज भी दहशत

उस दिन बचे यात्रियों के लिए यह मंजर आज भी किसी खौफनाक सपने से कम नहीं।
लोगों के बयान आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं —
एक पल पहले हम उतर रहे थे, अगले ही पल हमारे आसपास सबकुछ बिखर गया…

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