झारखंड : सुप्रीम कोर्ट की सख्ती…सारंडा अभयारण्य में अब नहीं होगी खनन की अनुमति…झारखंड सरकार को फटकार, जानिए क्या है मामला?

Supreme Court's strictness... Mining will no longer be allowed in Saranda Sanctuary... Jharkhand government reprimanded, know what is the matter?

झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है. सोमवार को चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा कि प्रस्तावित अभयारण्य क्षेत्र में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी. कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा अपने पिछले आश्वासनों पर अमल नहीं करने को लेकर असंतोष जताया.

सुनवाई के दौरान, न्याय मित्र वरीय अधिवक्ता के. परमेश्वर ने राज्य सरकार के बदलते रुख पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने बताया कि पहले 57,519 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित था, जिसे बाद में घटाकर 31,468 हेक्टेयर किया गया और अब राज्य सरकार केवल 24,941 हेक्टेयर क्षेत्र को ही अभयारण्य घोषित करना चाहती है. न्याय मित्र ने कहा कि जिन 126 खनन प्रभागों में पहले खनन न होने की बात थी, अब उन्हीं हिस्सों को अभयारण्य क्षेत्र से बाहर रखा जा रहा है.

सेल (SAIL) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा कि कुछ खदानें आवंटित हैं, पर चालू नहीं हुईं. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि कानून सरकार और खनन एजेंसियों के लिए अलग नहीं हो सकता.

कोर्ट ने राज्य सरकार को दी चेतावनी!

अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार पिछले आदेशों का पालन नहीं करती है, तो मुख्य सचिव को अवमानना का सामना करना पड़ सकता है. इस बीच, सात ग्राम सभाओं ने अपने पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप याचिका दायर की है. मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी. बता दें कि पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा, जिसका स्थानीय अर्थ ‘सात सौ पहाड़ियां’ है, भारत के लौह अयस्क भंडार का लगभग 26% हिस्सा रखता है.

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