झारखंड : आलमगीर आलम पर ईडी का बड़ा एक्शन…8 नए नामों के साथ चौथी चार्जशीट दाखिल, 44 करोड़ की संपत्ति जब्त, जानिए क्या है मामला?
ED takes major action against Alamgir Alam... Fourth charge sheet filed with 8 new names, property worth Rs 44 crore seized, know what is the matter?...

झारखंड ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर मैनेज करने और कमीशनखोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर कर दी है. इस नवीनतम चार्जशीट में आठ नए लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिससे इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है.
नए आरोपियों में प्रमुख ठेकेदार, प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोगी और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं. ईडी ने इन सभी पर अपराध की आय उत्पन्न करने, उसे संभालने और वैध बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप लगाया है. चौथी अनुपूरक शिकायत में अपराध की आय उत्पन्न करने वाले कई ठेकेदारों की विशिष्ट भूमिकाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है.
ED, Ranchi has filed its fourth Supplementary Prosecution Complaint (PC) on 22.10.2025 before the Hon’ble Special PMLA Court, Ranchi, in the ongoing money laundering investigation into a massive corruption syndicate within the Rural Works Department, Government of Jharkhand in…
— ED (@dir_ed) October 24, 2025
नए चार्जशीट में इनकी भूमिकाएं उजागर
ठेकेदार राजेश कुमार: राजेश कुमार और उनकी कंपनियों ने ₹1.88 करोड़ की रिश्वत देने और अवैध कमीशन के रूप में दो लक्जरी वाहन (एक टोयोटा इनोवा और एक टोयोटा फॉर्च्यूनर) देने की बात स्वीकार की है.
ठेकेदार राधा मोहन साहू: इन्होंने भी 39 लाख की रिश्वत देने और उसी उद्देश्य के लिए अपने बेटे अंकित साहू के नाम पर पंजीकृत एक टोयोटा फॉर्च्यूनर देने की बात स्वीकारी है. प्रोसिड ऑफ क्राइम के रूप में चिन्हित ये तीनों वाहन (राजेश कुमार और राधा मोहन साहू द्वारा दिए गए) वीरेंद्र कुमार राम के कब्जे से जब्त किए गए थे.
अन्य प्रमुख सहयोगी: वीरेंद्र कुमार राम के सहयोगी अतिकुल रहमान उर्फ अतिकुल रहमान अंसारी के परिसर से ₹4.40 लाख नकद जब्त किए गए थे.
अधिकारियों के लिए बिचौलिए का काम करने वाले ठेकेदार राजीव कुमार सिंह के आवास से 2.13 करोड़ की बेहिसाब नकदी मिली थी। राजीव कुमार सिंह ने लगभग ₹15 करोड़ की कमीशन राशि जुटाने और संभालने की बात स्वीकार की है.
सह-आरोपी संजीव कुमार लाल (तत्कालीन मंत्री के निजी सचिव) की पत्नी रीता लाल पर प्रोसिड ऑफ क्राइम से संपत्तियां खरीदने और दागी धन को वैध आय के रूप में पेश करने का आरोप लगाया गया है.
मामले की जड़ और ईडी की कार्रवाई
ईडी की यह जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जमशेदपुर द्वारा दर्ज एक मूल अपराध पर आधारित है। यह मामला नवंबर 2019 में दर्ज हुआ था, जब विभाग के कनिष्ठ अभियंता सुरेश प्रसाद वर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था. उस समय तलाशी में विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम से जुड़े ठिकानों से 2.67 करोड़ नकद जब्त किए गए थे.
ईडी की जांच में पाया गया कि ग्रामीण कार्य विभाग के भीतर एक विशाल भ्रष्टाचार सिंडिकेट काम कर रहा था। जांच में सामने आया कि तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम की अवैध कमीशन संग्रह के प्रबंधन में मुख्य भूमिका थी.
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम कथित तौर पर निविदाओं पर एक निश्चित कमीशन लेते थे, जिसे उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल और उनके सहयोगियों द्वारा वसूला जाता था.
44 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क
सिंडिकेट से जुड़े ठिकानों पर पहले की गई तलाशी में 37 करोड़ से अधिक की नकद राशि जब्त की गई थी. इस अवैध नकदी को बाद में दिल्ली स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और एंट्री ऑपरेटरों के एक नेटवर्क के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग किया गया और इसका उपयोग महंगी संपत्तियां खरीदने में किया गया.
ईडी ने जांच में अब तक 44 करोड़ से अधिक की संपत्ति की पहचान की है और उन्हें अस्थायी रूप से कुर्क किया है. ईडी ने चार्जशीट में नामित सभी आरोपियों पर मुकदमा चलाने और अपराध की आय के रूप में पहचानी गई सभी संपत्तियों को जब्त करने का अनुरोध किया है। मामले में आगे की जांच जारी है.



















