झारखंड : सारंडा में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का बमबारी फैसला…सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सरकार को दी ऐतिहासिक राहत

The Supreme Court has granted a historic relief to the Hemant government in the Saranda Wildlife Sanctuary.

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के प्रसिद्ध सारंडा जंगल के एक बड़े हिस्से को वन अभयारण्य घोषित करने की अनुमति बीते बुधवार को दे दी है. मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कल इस मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को सेंक्चुअरी घोषित करने की अनुमति दी.

हालांकि, कोर्ट ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण रियायत देते हुए सेल (SAIL) और अन्य वैद्य माइनिंग लीज को इस सेंक्चुअरी के प्रभाव क्षेत्र से मुक्त रखने का भी निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्टील उत्पादन और SAIL द्वारा राष्ट्रीय महत्व की चीजों में स्टील की आपूर्ति के महत्व को देखते हुए यह फैसला लिया.

झारखंड सरकार ने दिया था शपथ पत्र

सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे. मंगलवार को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक शपथ पत्र दायर किया था. इस शपथ पत्र में कहा गया था कि सारंडा अपनी जैव-विविधता और प्राकृतिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसे पूरी तरह से वन अभयारण्य घोषित करना झारखंड के लिए नुकसानदेह हो सकता है. सरकार ने यह दलील दी थी कि वन एवं वन्य जीवों का संरक्षण वन अभयारण्य घोषित किए बिना भी संभव है, जिसके लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) द्वारा दिए गए आदेश के मुकाबले क्षेत्रफल में हुई वृद्धि का कारण जानना चाहा. राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि Wildlife Institute of India ने पहले 5,519.41 हेक्टेयर को सेंक्चुअरी घोषित करने का प्रस्ताव दिया था, जिस पर सरकार सहमत नहीं थी.

उन्होंने बताया कि सरकार को NGT के दिशा निर्देश के आलोक में 31,468.25 हेक्टेयर को सेंक्चुअरी घोषित करने में कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते खनन प्रभावित न हो. सिब्बल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने और 31,468.25 हेक्टेयर को चिह्नित करने की अनुमति मांगी.

इसके विपरीत, एमिकस क्यूरी ने सरकार के चिह्नित करने के अनुरोध का विरोध किया. उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही शपथ पत्र में यह स्वीकार कर चुकी है कि 31,468.25 हेक्टेयर को चिह्नित किया जा चुका है और इस क्षेत्र में कहीं भी माइनिंग का काम नहीं हो रहा है.

अदालत ने सरकार को क्या दिया निर्देश?

SAIL की ओर से न्यायालय से यह अनुरोध किया गया कि सेंक्चुअरी घोषित करने से उनकी माइनिंग प्रभावित न हो, क्योंकि सेंक्चुअरी के एक किलोमीटर के बाहर तक भी माइनिंग प्रतिबंधित रहती है. न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए SAIL और वैध माइनिंग को सेंक्चुअरी के प्रभाव से मुक्त रखने का निर्देश दिया.

कोर्ट ने अब राज्य सरकार को इस आदेश के आलोक में एक सप्ताह के अंदर नया शपथ पत्र दायर करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही, न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने से भी मुक्त कर दिया.

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